बाघ और तेंदुए के शिकार में शामिल डिप्टी रेंजर सहित 9 आरोपी गिरफ्तार

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🐯बाघ और तेंदुए के शिकार में शामिल डिप्टी रेंजर सहित 9 आरोपी गिरफ्तार

जंगल का गुनहगार कौन? जब रक्षक ही बन गया शिकारी…



छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिन हाथों में जंगल और जानवरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही हाथ शिकार के खेल में रंगे मिले।

वन विभाग की एक बड़ी कार्रवाई में बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार का खुलासा हुआ है—और इस पूरे खेल में चौंकाने वाला नाम सामने आया एक डिप्टी रेंजर का।

🔍 कैसे खुला राज?

सूचना मिली कि जंगल में फंदे लगाकर वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है। इसके बाद वन विभाग और उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त अभियान चलाया।
लगातार निगरानी के बाद एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ—जो बड़े शातिर तरीके से काम कर रहा था।

जांच में सामने आया कि डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम ही इस गिरोह को जंगल में एंट्री दिला रहा था। उसकी मदद से शिकारी बिना डर जंगल में फंदे बिछा रहे थे।

लोहे के तार के फंदों में मांस लगाकर बाघ और तेंदुए को फंसाया गया।
इस क्रूर तरीके से दोनों वन्यजीवों की जान चली गई। बरामद बाघ की उम्र करीब 3 साल बताई गई है।

💰 खाल का काला कारोबार

शिकार के बाद आरोपी बाघ और तेंदुए की खाल को रायपुर में बेचने की फिराक में थे।
लेकिन उससे पहले ही टीम ने कार्रवाई कर पूरे गिरोह को दबोच लिया।

👮‍♂️ 9 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम, छत्रू कुड़ियाम, मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी।

ग्राम केशापुर में दबिश देकर तेंदुए की खाल भी बरामद की गई।

⚖️ सख्त कानून, सख्त कार्रवाई

बाघ और तेंदुआ दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 में आते हैं—यानी इनके शिकार पर सबसे कड़ी सजा का प्रावधान है।
सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

🗣️ सरकार का साफ संदेश

वन मंत्री केदार कश्यप ने साफ कहा—
“वन्यजीवों का शिकार बर्दाश्त नहीं होगा, चाहे आरोपी कोई भी हो।”

🌿 एक सवाल बाकी है…

जब जंगल का रखवाला ही शिकारी बन जाए, तो जंगल सुरक्षित कैसे रहेगा?

इस कार्रवाई ने जहां एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, वहीं यह भी साबित किया है कि सिस्टम के भीतर छिपे गुनहगारों पर भी अब शिकंजा कसना शुरू हो चुका है।

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