वन विभाग में करोड़ों का घोटाला, नगरी परिक्षेत्र में स्टॉप डेम निर्माण में भारी भ्रष्टाचार,
पहली ही बारिश में बहा निर्माण.. जांच के नाम पर खानापूर्ति
उत्तम साहू
नगरी/धमतरी वन मंडल में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2022–23 में धमतरी वनमंडल के नगरी वन परिक्षेत्र में कैंपा मद से नरवा विकास योजना के तहत बनाए गए स्टॉप डेम निर्माण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोप है कि तत्कालीन डीएफओ, वर्तमान एसडीओ और संबंधित रेंजर की देखरेख में करोड़ों रुपये के कार्यों में जमकर घोटाला किया गया।
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन यहां जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में विकास कार्यों की राशि का खुलकर दुरुपयोग किया गया। जानकारी के अनुसार नगरी वन परिक्षेत्र के भालू पानी नाला और गज कन्हार क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से स्टॉप डेम का निर्माण कराया गया था।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य में तय मानकों की खुलकर अनदेखी की गई। ठेकेदार ने मनमाने तरीके से निर्माण कराया और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पूरे समय मूकदर्शक बने रहे। परिणाम यह हुआ कि लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्टॉप डेम पहली ही बारिश में टूटकर बह गया, जिससे पूरा निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण में भारी अनियमितता उजागर होने के बाद भी संबंधित एसडीओ और रेंजर आज तक अपने पदों पर बने हुए हैं। भ्रष्टाचार के इतने स्पष्ट प्रमाण सामने आने के बावजूद कार्रवाई न होना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि पूरे मामले को विभागीय स्तर पर दबाने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि धमतरी वनमंडल में वर्ष 2022–23 के दौरान कैंपा मद से बड़ी संख्या में कार्य कराए गए थे, जिनमें मुख्य रूप से सड़क निर्माण, चेक डेम, तालाब, वन्यजीवों के लिए जल स्रोत निर्माण, जानवरों के चारे के लिए पौधरोपण, वन्यजीव आवास निर्माण और जंगलों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने जैसे कार्य शामिल हैं। यदि इन सभी कार्यों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर किए गए सुनियोजित भ्रष्टाचार का खुलासा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
जंगल सूखा, गांवों की ओर बढ़ रहे वन्यजीव
वन्यजीवों के लिए बनाई गई इन जल संरचनाओं के असफल होने से जंगलों में जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं। नतीजतन हिरण, जंगली सुअर, नीलगाय समेत अन्य जंगली जानवर पानी की तलाश में गांवों और खेतों की ओर भटक रहे हैं, जिससे फसलों को नुकसान और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडराने लगा है। वन विभाग के दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत यह है कि वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और स्थायी जल व्यवस्था करने के बजाय कागजी योजनाओं और ठेकेदारी ने जंगल को और अधिक संकट में धकेल दिया है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की बात कही है। ऐसे में नगरी वन परिक्षेत्र में सामने आया यह मामला सरकार की नीति और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा शासन को हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारियों से रिकवरी के माध्यम से की जाए।
फिलहाल वन विभाग के करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।




