कलेक्टर की पहल से फसलचक्र परिवर्तन बना संजीवनी: बढ़ी आय, बचा पानी

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कलेक्टर की पहल से फसलचक्र परिवर्तन बना संजीवनी: बढ़ी आय, बचा पानी
मक्का की लहर से खुश किसान रामप्रकाश



               उत्तम साहू,धमतरी, 19 जनवरी 2026।

कभी धान-प्रधान खेती के लिए पहचान रखने वाला धमतरी जिला अब कृषि नवाचार की नई मिसाल बनता जा रहा है। यहां के किसान पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं, बल्कि सोच, संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ विकास की दिशा में बड़ा परिवर्तन है।

इस बदलाव के पीछे जिला प्रशासन की दूरदर्शी सोच और कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा का प्रभावी नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनके मार्गदर्शन में फसलचक्र परिवर्तन को एक अभियान के रूप में लागू किया गया, जिसमें किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण देने और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशासन और कृषि विभाग की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों से सीधा संवाद किया, जिससे उनमें नई फसलों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ।

ग्राम गट्टासिल्ली तालपारा के प्रगतिशील किसान रामप्रकाश नेताम इस परिवर्तन के प्रेरक उदाहरण बनकर उभरे हैं। पहले वे पूरी तरह धान की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब 3.5 एकड़ भूमि में मक्का की फसल लेकर बेहतर उत्पादन और आय हासिल कर रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और समय पर कीट प्रबंधन ने उनकी खेती को अधिक लाभकारी बना दिया है।

आज रामप्रकाश ही नहीं, बल्कि जिले के सैकड़ों किसान मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। खेतों में लहलहाती मक्का की फसल इस सकारात्मक बदलाव की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। इससे जहां किसानों की आय में वृद्धि हुई है, वहीं खेती में जोखिम भी कम हुआ है।

फसलचक्र परिवर्तन का प्रभाव पर्यावरण पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कम पानी वाली फसलों के कारण सिंचाई की जरूरत घट रही है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है। साथ ही, विविध फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरता में सुधार हो रहा है।

यह पहल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय को स्थिर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और किसानों में आत्मनिर्भरता की भावना भी सुदृढ़ हुई है।

कुल मिलाकर, धमतरी में फसलचक्र परिवर्तन एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। प्रशासन की सक्रियता और किसानों की भागीदारी ने इसे संभव बनाया है। आने वाले समय में यह पहल न केवल धमतरी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कृषि नवाचार और सतत विकास का प्रेरणास्रोत बनेगी।

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