नगरी का उजाला: एक मैदान, कई बदलाव की कहानी

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नगरी का उजाला: एक मैदान, कई बदलाव की कहानी

अध्यक्ष बलजीत छबड़ा की पहल ने रोशन हुआ हाईस्कूल मैदान 



उत्तम साहू 

नगरी का वार्ड क्रमांक 7 स्थित हाई स्कूल मैदान अब सिर्फ खेल का स्थान नहीं रहा—यह बदलाव, सुरक्षा और सामुदायिक जीवन का जीवंत उदाहरण बन गया है। वर्षों तक अंधेरे में डूबा यह मैदान, जहां शाम होते ही सन्नाटा और असुरक्षा का माहौल पसर जाता था, अब चार हाई मास्ट लाइटों की रोशनी में नई पहचान गढ़ रहा है।

नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छबड़ा की पहल ने इस पुराने मुद्दे को जड़ से खत्म कर दिया है। जैसे ही सूरज ढलता है, मैदान अब लोगों की चहल-पहल से भर उठता है। बच्चे खेलते हैं, युवा अभ्यास करते हैं और बुजुर्ग सुकून भरी सैर का आनंद लेते हैं। यह बदलाव सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकता का भी है।

इस पहल के पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य था—नगर के सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित, उपयोगी और जीवंत बनाना। हाई स्कूल मैदान के साथ-साथ शहर के अन्य हिस्सों में भी यही सोच दिखाई देती है। जंगलपारा स्कूल परिसर, पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा स्थल, राजाबाड़ा अटल परिसर, रावणभाठा और अन्य वार्डों में हाई मास्ट लाइट लगाकर अंधेरे को पीछे धकेला गया है।

नवरात्रि से पहले वार्ड 15 स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में की गई प्रकाश व्यवस्था ने धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को भी नया आयाम दिया है। यह पहल केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर और मानसिक सुरक्षा को भी मजबूत करती है।

पहले जहां लोग व्यस्त सड़कों पर जोखिम उठाकर टहलने को मजबूर थे, वहीं अब यह मैदान एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। यह परिवर्तन नगर के विकास की दिशा को भी स्पष्ट करता है—जहां सुविधाएं सीधे आमजन के जीवन को बेहतर बनाती हैं।

हाई मास्ट लाइट का शुभारंभ जनप्रतिनिधियों और स्थानीय पार्षदों की मौजूदगी में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया, जो इस पहल के प्रति सामूहिक समर्थन को दर्शाता है।

आज यह मैदान केवल रोशनी से नहीं, बल्कि उम्मीदों से भी जगमगा रहा है। नगरी के लिए यह पहल एक संकेत है कि जब इरादे मजबूत हों, तो बदलाव दूर नहीं होता।

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