15 दिनों में 52 जमीनों के डायवर्सन पर बवाल: विधायक अंबिका मरकाम ने निष्पक्ष जांच और अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग की

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15 दिनों में 52 जमीनों के डायवर्सन पर बवाल: 

विधायक अंबिका मरकाम ने निष्पक्ष जांच और अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग की



                   उत्तम साहू 11 अप्रेल 2026

नगरी। नगरी क्षेत्र में मात्र 15 दिनों के भीतर 52 जमीनों के डायवर्सन (भूमि उपयोग परिवर्तन) किए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सिहावा विधानसभा क्षेत्र की विधायक अंबिका मरकाम ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।

विधायक ने आरोप लगाया कि नगरी अनुभाग की नियमित अनुविभागीय अधिकारी प्रीति दुर्गम के अवकाश पर रहने के दौरान प्रभार में आए अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को दरकिनार कर बड़ी संख्या में डायवर्सन आदेश जारी किए। उनका कहना है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण होना कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि भूमि डायवर्सन एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें दस्तावेजों की जांच, स्थल निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों का परीक्षण, नक्शा सत्यापन, आपत्ति आमंत्रण तथा नियमानुसार आदेश पारित करने जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में 15 दिनों में 52 मामलों का निपटारा संदेहास्पद प्रतीत होता है।

विधायक ने अपने अनुभव का दिया उदाहरण

अंबिका मरकाम ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपनी जमीन के डायवर्सन के लिए आवेदन किया था, जिसमें लगभग चार माह का समय लगा था। ऐसे में यह समझ से परे है कि 52 मामलों में इतनी तेजी कैसे दिखाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी प्रकरणों में नियमानुसार जांच, निरीक्षण और राजस्व प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं।

जानिए डायवर्सन की प्रक्रिया क्या है?

भूमि डायवर्सन का अर्थ कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या अन्य उपयोग के लिए परिवर्तित करना होता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा संबंधित राजस्व नियमों के तहत की जाती है। इसमें निम्न प्रमुख बिंदु शामिल होते हैं

  1. आवेदन प्रस्तुत करना – भूमि स्वामी द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन देना।
  2. दस्तावेज सत्यापन – खसरा, बी-1, नक्शा, स्वामित्व रिकॉर्ड आदि की जांच।
  3. स्थल निरीक्षण – संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा मौके का निरीक्षण।
  4. भूमि की प्रकृति का परीक्षण – यह सुनिश्चित करना कि भूमि विवादित, शासकीय, वनभूमि या प्रतिबंधित श्रेणी की न हो।
  5. शुल्क निर्धारण व जमा – प्रीमियम, शुल्क एवं अन्य देय राशि जमा करना।
  6. आदेश जारी करना – सक्षम अधिकारी द्वारा नियमों के अनुरूप अंतिम आदेश।

यदि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना आदेश जारी किए जाते हैं, तो ऐसे आदेश जांच के दायरे में आ सकते हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

विधायक ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, यह पता लगाया जाए कि किन-किन प्रकरणों में आदेश दिए गए, क्या सभी मामलों में नियमों का पालन हुआ, और यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की जाए।

कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी

इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनवर रजा, वरिष्ठ कांग्रेसी भानेद्र ठाकुर, भरत निर्मलकर विधायक प्रतिनिधि सचिन भंसाली तथा अन्य कार्यकर्ता एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

प्रशासन की नजरें जांच पर

मामले के सामने आने के बाद अब लोगों की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिक गई हैं। यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो यह राजस्व विभाग के लिए बड़ा मामला साबित हो सकता है।

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