आईआईटी भिलाई में पीएमश्री शिक्षकों का क्षमता निर्माण प्रशिक्षण संपन्न

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आईआईटी भिलाई में पीएमश्री शिक्षकों का क्षमता निर्माण प्रशिक्षण संपन्न


उत्तम साहू 

धमतरी/नगरी- छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग एवं समग्र शिक्षा के निर्देशानुसार पीएमश्री स्कूलों के विज्ञान एवं गणित शिक्षकों के लिए “टीचर्स कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम” के तहत पांच दिवसीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन आईआईटी भिलाई में किया गया। इस प्रशिक्षण में राज्यभर से कुल 151 शिक्षकों ने भाग लिया, जिनका उद्देश्य आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों में दक्षता हासिल करना रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीएमश्री स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार करना तथा उन्हें डिजिटल लर्निंग, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग और तकनीकी नवाचारों से जोड़ना था। इस दौरान शिक्षकों को स्मार्ट क्लास, लैब आधारित शिक्षा, ग्रीन स्कूल, कौशल शिक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।



प्रशिक्षण में शिक्षकों को प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, डिजिटल टूल्स, ह्यूमन बॉडी, विज्ञान आश्रम कॉन्सेप्ट, एडोबी ब्रिक्स से निर्माण, सस्टेनेबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटर और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही आईआईटी भिलाई की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का अवलोकन भी कराया गया।

धमतरी जिले से चार पीएमश्री स्कूलों के शिक्षकों—गोपाल साहू (बठेना), कौशलपुरी गोस्वामी (कुरूद), पोषण निषाद (भैंसमुण्डी) और वासुदेव साहू (नगरी) ने इस प्रशिक्षण में सहभागिता निभाई।


समापन समारोह में सभी प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। रायपुर जोन की ओर से व्याख्याता वासुदेव साहू ने प्रशिक्षण पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रहा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान मिली व्यावहारिक सीख और मार्गदर्शन से उनके शिक्षण कौशल में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।

कार्यक्रम में पीएमश्री कोऑर्डिनेटर आशीष गौतम, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा धमतरी, आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश, प्रो. गगन राज गुप्ता, निकेत जायसवाल, सुब्बा नायडू सहित अनेक शिक्षकों एवं विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पीएमश्री स्कूलों को गुणवत्ता और नवाचार के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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