महिला आरक्षण पर सियासत तेज: कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, ‘परिसीमन की आड़ में राजनीति’ का आरोप

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महिला आरक्षण पर सियासत तेज: कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, ‘परिसीमन की आड़ में राजनीति’ का आरोप

कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की पक्षधर रही है..विधायक अंबिका मरकाम



उत्तम साहू 

बालोद/नगरी। महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी बालोद द्वारा राजीव भवन में आयोजित जिलास्तरीय पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं को अधिकार देने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन का सहारा लिया जा रहा है।

पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की पक्षधर रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) संसद के दोनों सदनों में पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर कानून बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया जा रहा है।

मरकाम ने सवाल उठाया कि जब कानून अस्तित्व में है, तो सरकार इसे तत्काल प्रभाव से लागू क्यों नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि वर्तमान लोकसभा की सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत आरक्षण देकर इसे लागू किया जा सकता है, जिसके लिए कांग्रेस पहले ही समर्थन दे चुकी है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत 131वां संविधान संशोधन विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश थी। इस प्रस्ताव में 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई थी, जिसे कांग्रेस ने जनविरोधी करार दिया।

वहीं, डौन्डीलोहारा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिला भेंडिया ने भी केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब 2026-27 की नई जनगणना शुरू हो चुकी है और सरकार जातिगत जनगणना की बात स्वीकार कर चुकी है, तो पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण देने की नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक हित के अनुसार सीटों का पुनर्गठन करने की थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।

भेंडिया ने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को जो आरक्षण मिला है, वह कांग्रेस की देन है। उन्होंने बताया कि 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पहली बार पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में 1993 में पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने कानून का रूप दिया। इसी तरह 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देशभर में 15 लाख से अधिक महिला जनप्रतिनिधि स्थानीय निकायों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा द्वारा आयोजित जनाक्रोश रैलियों को भी फ्लॉप करार दिया और कहा कि जनता अब वास्तविक मुद्दों को समझ चुकी है।

इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी बालोद के अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, उपाध्यक्ष रामजी पटेल, पुरुषोत्तम पटेल, महामंत्री भोजराज साहू, सतीश यादव, प्रवक्ता मोंटू चंद्राकर, सचिव अजय लोनहारे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष अंचल प्रकाश साहू, ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र सिन्हा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद्मिनी साहू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

समापन:
महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बात स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और भी जोर पकड़ेगा। जहां एक ओर कांग्रेस इसे तत्काल लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

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