नक्सल शून्यता बनाए रखने की बड़ी चुनौती: सीमावर्ती ट्राईजंक्शन पर हाई-अलर्ट, इंटेलिजेंस और जनसंवाद पर फोकस

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नक्सल शून्यता बनाए रखने की बड़ी चुनौती: सीमावर्ती ट्राईजंक्शन पर हाई-अलर्ट, इंटेलिजेंस और जनसंवाद पर फोकस

एसपी ने जिले के अंतिम छोर पर स्थित बोरई, कुन्दई (ओडिशा) और विश्रामपुरी (कोंडागांव) के ट्राईजंक्शन पर लिए महत्वपूर्ण बैठक संपन्न 



          उत्तम साहू नगरी,धमतरी ,30 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में नक्सल प्रभाव के बाद बदलते सुरक्षा परिदृश्य को लेकर पुलिस अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। नक्सल शून्यता को स्थायी बनाने की दिशा में पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में अपनी रणनीति और अधिक आक्रामक कर दी है। इसी कड़ी में 

जिले के अंतिम छोर पर स्थित बोरई, कुन्दई (ओडिशा) और विश्रामपुरी (कोंडागांव) के ट्राईजंक्शन पर एसपी सूरज सिंह परिहार के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें अंतरराज्यीय सहयोग और खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने बैठक में साफ संकेत दिए कि अब फोकस सिर्फ नक्सल गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध गांजा तस्करी और अन्य आपराधिक नेटवर्क पर भी समान रूप से सख्ती की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय गिरोहों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।

सीमा पर सख्ती: संयुक्त ऑपरेशन और नाकेबंदी

बैठक में यह तय किया गया कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर संयुक्त चेकिंग अभियान लगातार चलाए जाएंगे। रात्रि गश्त को और सघन बनाया जाएगा, साथ ही संवेदनशील मार्गों पर स्थायी नाके स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य संभावित रास्तों पर औचक नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की गहन जांच की जाएगी।

इंटेलिजेंस नेटवर्क बनेगा सबसे बड़ा हथियार

एसपी परिहार ने स्पष्ट किया कि बदलते हालात में सबसे प्रभावी हथियार मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क ही है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर विश्वसनीय मुखबिर तंत्र विकसित करने और हर छोटी-बड़ी सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस अब तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर सूचना तंत्र को सशक्त करने की दिशा में काम करेगी।

जनसंवाद से विश्वास, विश्वास से सुरक्षा

पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे गांवों में पुलिस-जन संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों को नियमित ग्राम भ्रमण कर ग्रामीणों से सीधे जुड़ने, उनकी समस्याएं सुनने और त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। रणनीति साफ है—विश्वास निर्माण के जरिए ही नक्सल विचारधारा की वापसी को रोका जा सकता है।

युवा होंगे केंद्र में, खेल और जागरूकता पर जोर

पुलिस ने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेलकूद और जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। अधिकारियों का मानना है कि सकारात्मक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ने से वे भटकाव से दूर रहेंगे और क्षेत्र में स्थायी शांति कायम होगी।

गांजा तस्करी पर विशेष नजर

बैठक में ओडिशा से आने वाली गांजा तस्करी को गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। इस पर अंकुश लगाने के लिए संभावित मार्गों की पहचान कर वहां स्थायी नाके लगाए जा रहे हैं, जबकि अन्य मार्गों पर लगातार औचक कार्रवाई की जाएगी।

अंतरराज्यीय तालमेल बना ताकत

इस समन्वय बैठक में धमतरी जिले के पुलिस अधिकारियों के साथ ओडिशा और कोंडागांव जिले के पुलिस अधिकारी भी शामिल हुए। यह स्पष्ट संदेश है कि अब सीमाएं अपराधियों के लिए ढाल नहीं बनेंगी, बल्कि राज्यों के बीच तालमेल ही उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनेगा।

निष्कर्ष:
धमतरी पुलिस की यह पहल संकेत देती है कि नक्सल शून्यता केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। मजबूत इंटेलिजेंस, सख्त निगरानी और जनता के साथ भरोसे का रिश्ता—इन्हीं तीन स्तंभों पर अब क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति टिकी हुई है।

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