पांडुलिपियाँ हमारी पहचान और गौरव, संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 11 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण हेतु सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ देशभर की प्राचीन पांडुलिपियों को खोजने, संरक्षित करने और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। यह अभियान भारत की ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को संजोने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि नागरिकों का छोटा-सा प्रयास भी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने में बड़ा योगदान सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रूप से भावी पीढ़ियों तक पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी जड़ों को सहेजने और इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया।
प्रदेश में तेजी से चल रहा सर्वेक्षण अभियान
मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ की नियमित सहभागिता हो रही है। राज्य के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन एवं नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि शेष 7 जिलों में प्रक्रिया जारी है।
जिलों में पांडुलिपि संग्रहकर्ताओं और संस्थाओं की पहचान की जा रही है तथा ग्राम एवं क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। संस्कृति विभाग द्वारा क्षेत्रीय संयोजकों के सहयोग से जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
अब तक केंद्र सरकार से राज्य में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी, जबकि वर्तमान में 6 जिलों में सर्वेक्षण कार्य शुरू होकर ज्ञानभारतम एप के माध्यम से 4191 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

