जंगली बिल्ली के काटने से महिला की मौत: झाड़-फूंक और झोलाछाप इलाज के चक्कर में गई जान
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां जंगली बिल्ली के काटने से घायल हुई 65 वर्षीय महिला की समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और झोलाछाप डॉक्टर के भरोसे इलाज कराया, जिससे रेबीज संक्रमण बढ़ता गया और आखिरकार महिला ने दम तोड़ दिया।
मृतिका की पहचान मातिन कुंवर के रूप में हुई है, जो ग्राम पंचायत जलके के पनगवां की निवासी थीं। परिजनों के अनुसार करीब 20 से 25 दिन पहले वह पास के जंगल में गई थीं, जहां एक पागल जंगली बिल्ली ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके बाएं पैर पर गंभीर चोट आई थी।
घटना के बाद परिवार वालों ने उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के एक कथित बाबा के पास झाड़-फूंक के लिए ले गए। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन सही इलाज नहीं मिल सका।
परिजनों ने बताया कि पिछले दिनों मौसम में अचानक बदलाव, बिजली चमकने और बारिश के दौरान महिला की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। डॉक्टरों के अनुसार यह रेबीज के स्पष्ट लक्षण थे, जिसमें मरीज को पानी, रोशनी और आवाज से डर लगने लगता है।
हालत ज्यादा गंभीर होने पर 15 अप्रैल को परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली डोज दी गई। लेकिन तब तक संक्रमण शरीर में फैल चुका था। बाद में अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, मगर महिला की जान नहीं बच सकी।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में रेबीज संक्रमण से मौत की पुष्टि की है। हालांकि मौत के सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगा।
यह घटना समय पर सही इलाज और जागरूकता की कमी का गंभीर उदाहरण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जंगली या पालतू जानवर के काटने पर तुरंत अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज उपचार कराना बेहद जरूरी है।

