छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई: बोर्ड परीक्षा में खराब रिजल्ट पर 8 प्राचार्य निलंबित, 14 की वेतनवृद्धि रोकी

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छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई: बोर्ड परीक्षा में खराब रिजल्ट पर 8 प्राचार्य निलंबित, 14 की वेतनवृद्धि रोकी



छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। इसी कड़ी में बालोद जिले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 8 स्कूल प्राचार्यों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोक दी गई है। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों में हलचल तेज हो गई है।

खराब परीक्षा परिणाम बना कार्रवाई की वजह

जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, वहां परीक्षा परिणाम बेहद कमजोर रहे। कई स्कूलों का रिजल्ट 30 प्रतिशत से 47 प्रतिशत तक ही सीमित रहा। हैरानी की बात यह भी है कि इनमें कुछ ऐसे विद्यालय शामिल हैं, जहां पिछले वर्ष शत-प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, लेकिन इस बार केवल करीब 60 प्रतिशत छात्र ही परीक्षा पास कर सके।

जिला प्रशासन का मानना है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही और शैक्षणिक निगरानी की कमी के कारण परिणामों में भारी गिरावट आई। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित प्राचार्यों को निलंबित कर ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों में अटैच किया गया है।

जिले की रैंकिंग भी रही कमजोर

राज्य स्तर पर जारी परीक्षा परिणामों में बालोद जिले की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही। दसवीं कक्षा के परिणाम में जिला 29वें स्थान पर रहा, जबकि बारहवीं कक्षा में 30वें स्थान पर पहुंच गया। जिले के कमजोर प्रदर्शन को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए यह सख्त कदम उठाया है।

शिक्षक संगठनों ने जताया विरोध

प्राचार्यों के निलंबन के बाद शिक्षक और प्राचार्य संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ प्राचार्य संघ की बैठक में कार्रवाई को अनुचित और एकतरफा बताया गया। संघ का कहना है कि केवल प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि कलेक्टर को सीधे प्राचार्यों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार कलेक्टर केवल अनुशंसा कर सकते हैं, जबकि अंतिम कार्रवाई स्कूल शिक्षा विभाग और डीपीआई स्तर से होनी चाहिए। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि डीईओ अपनी जिम्मेदारी अधीनस्थ अधिकारियों पर डाल रहे हैं।

इन जिलों के परिणाम भी रहे चिंताजनक

राज्य में कई जिलों का परीक्षा परिणाम 70 प्रतिशत से नीचे रहा है। दसवीं कक्षा में सक्ती, बालोद, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा और एमसीबी जिले कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों में शामिल रहे। वहीं बारहवीं कक्षा में जांजगीर-चांपा और एमसीबी का परिणाम 70 प्रतिशत से कम दर्ज किया गया।

इसके अलावा 80 प्रतिशत से कम परिणाम वाले जिलों में कोण्डागांव, बिलासपुर, बलोदाबाजार, दुर्ग, बालोद और सक्ती शामिल हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर सरकार परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए सख्ती दिखा रही है, तो दूसरी ओर शिक्षक संगठन इसे दबाव की राजनीति और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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