सांकरा बांध में खिल रही आत्मनिर्भरता की नई फसल, महिलाओं की मखाना खेती बनी मिसाल

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सांकरा बांध में खिल रही आत्मनिर्भरता की नई फसल, महिलाओं की मखाना खेती बनी मिसाल


                          उत्तम साहू 

नगरी। ग्राम पंचायत सांकरा का बांध इन दिनों सिर्फ जलस्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन गया है। यहां 17 स्व सहायता समूहों की महिलाएं सामूहिक रूप से मखाना खेती कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं।

इसी पहल का जायजा लेने जिला पंचायत अध्यक्ष और सहायक संचालक उद्यानिकी सांकरा पहुंचे। अधिकारियों ने बांध में चल रही मखाना खेती का निरीक्षण किया और महिलाओं की मेहनत व लगन की खुलकर सराहना की।



निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि मखाना उत्पादन ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। यह पहल न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

अधिकारियों ने समूह की महिलाओं से खेती की प्रगति की जानकारी ली और उन्हें उन्नत तकनीक, बेहतर उत्पादन तथा बाजार संभावनाओं को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। महिलाओं को मखाना खेती से होने वाले आर्थिक लाभों की जानकारी देते हुए इसे भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी खेती बताया गया।

इस दौरान सरपंच नागेंद्र बोरझा सहित महेश साहू, बलदाऊ यादव, रमेश साहू, साधुराम साहू, भीखम साहू, सतीश साहू एवं रवि भट्ट मौजूद रहे। वहीं स्व सहायता समूहों की महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस पहल को गांव की महिलाओं के लिए नई उम्मीद बताया।

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