घठुला के सुशासन तिहार बना जल क्रांति की आवाज,
ग्रामीणों ने उठाई सोंढूर बांध से बालका नदी में पानी छोड़ने की मांग
उत्तम साहू,नगरी। सुशासन तिहार के मंच पर इस बार सिर्फ योजनाओं और घोषणाओं की चर्चा नहीं हुई, बल्कि वर्षों से जल संकट झेल रहे ग्रामीणों की पीड़ा भी खुलकर सामने आई। नगरी विकासखंड के ग्राम घठुला में आयोजित कार्यक्रम में आसपास के गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष एक अहम मांग रखी,सोंढूर बांध नहर से बालका नदी में पानी छोड़ा जाए, ताकि क्षेत्र में बढ़ते जल संकट से राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मी के दिनों में बालका नदी पूरी तरह सूख जाती है। नदी सूखने के साथ ही दर्जनों गांवों में पेयजल समस्या गहरा जाती है। हैंडपंप जवाब देने लगते हैं, कुएं सूख जाते हैं और किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता। पशुधन भी पानी की कमी से प्रभावित होता है।
इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों ने ग्राम पोड़ागांव के पास सोंढूर नहर में क्रॉस रेगुलेटर निर्माण कर सिहावा डिस्ट्रीब्यूटर से बालका नदी में पानी प्रवाहित करने की मांग प्रशासन के सामने रखी।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो इसका लाभ केवल नदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे इलाके के भू-जल स्तर में सुधार होगा। इससे कुएं, बोर और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और गर्मी के मौसम में लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधि उमेश देव सरपंच पोड़ागांव, वेदराम साहू उपसरपंच, राजू सोम पूर्व सरपंच घठुला सहित ग्रामीण सोमन साहू, मोनू साहू, कुबेर साहू और भोलाराम साहू ने बताया कि बालका नदी आगे चलकर महानदी में मिलती है। ऐसे में नदी में छोड़ा गया पानी व्यर्थ नहीं जाएगा, बल्कि प्राकृतिक जल प्रवाह को मजबूत करेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में सोंढूर जलाशय का पानी टेडगी नाला के जरिए महानदी तक पहुंचता है। ऐसे में बालका नदी को भी इस जल प्रणाली से जोड़ना क्षेत्र के लिए दूरगामी और जनहितकारी कदम साबित हो सकता है।
सुशासन तिहार में उठी यह मांग अब केवल एक आवेदन नहीं, बल्कि जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण जीवन से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखी जा रही है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी पहल पर टिकी हैं।

