सबसे दूर बसे गांवों तक पहुंची सरकार, जनजातीय गरिमा उत्सव बना बदलाव का उत्सव

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सबसे दूर बसे गांवों तक पहुंची सरकार, जनजातीय गरिमा उत्सव बना बदलाव का उत्सव



            उत्तम साहू,धमतरी, 25 मई 2026।
दूरस्थ जनजातीय अंचलों में शासन की योजनाओं की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया गया “जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान जिले में जनविश्वास और जनसहभागिता का बड़ा माध्यम बनकर उभरा। एक सप्ताह तक चले इस विशेष अभियान ने उन गांवों तक सुविधाएं पहुंचाईं, जहां अक्सर योजनाओं की जानकारी और सेवाओं की पहुंच सीमित रह जाती थी। अभियान के समापन पर आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव ने जनजातीय संस्कृति, परंपरा और सरकारी योजनाओं के संगम का अनूठा उदाहरण पेश किया।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में 18 से 25 मई तक चले इस अभियान के तहत पीएम-जनमन योजना से चिन्हित 121 गांवों की 133 बसाहटों और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के 108 गांवों में विशेष गतिविधियां संचालित की गईं। अभियान का फोकस विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने पर रहा।

आदि सेवा केन्द्रों में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रमों में ग्रामीणों की समस्याएं प्राथमिकता के साथ सुनी गईं। राशन कार्ड, पेंशन और मनरेगा से जुड़े मामलों का त्वरित निराकरण करते हुए दर्जनों हितग्राहियों को तत्काल राहत दी गई। ग्रामीणों ने पहली बार महसूस किया कि प्रशासन उनके गांव तक पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है।

अभियान के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर दिया गया। मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्वास्थ्य टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण, सिकल सेल जांच, टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर लगाए। बड़ी संख्या में लोगों को आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाते और जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा गया। इससे दूरस्थ इलाकों के लोगों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलना आसान होगा।

जनजातीय गरिमा उत्सव में जनजातीय समाज की संस्कृति और लोककलाओं की झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बना दिया। कमार सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों की भागीदारी ने उत्सव को विशेष पहचान दी।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने अभियान की सफलता पर सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज के सम्मान, संस्कृति और विकास को मजबूत करने का माध्यम भी बना।

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