बस स्टॉप नुनेरा में महिलाओं ने मनाया वट सावित्री का पर्व, पतियों की लंबी उम्र के लिए की वट वृक्ष की पूजा

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​बस स्टॉप नुनेरा में महिलाओं ने मनाया वट सावित्री का पर्व, पतियों की लंबी उम्र के लिए की वट वृक्ष की पूजा​

                       ज्ञान शंकर तिवारी 

पाली/नुनेरा। बस स्टॉप नुनेरा क्षेत्र में आज वट सावित्री का पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। क्षेत्र की विवाहित महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष (बरगद) की विशेष पूजा-अर्चना की।

पारंपरिक विधि-विधान से हुई पूजा सुबह से ही पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं का वट वृक्ष के पास पहुंचना शुरू हो गया था। महिलाओं ने वट वृक्ष को जल अर्पित कर उस पर रोली, अक्षत, फल और फूल चढ़ाए। पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा की और अपने अखंड सौभाग्य की कामना की।

सुनी सावित्री-सत्यवान की कथा पूजा के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट सावित्री व्रत की कथा सुनी। कथा में बताया गया कि किस प्रकार सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत्य धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। इस पर्व को भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

भक्तिमय हुआ वातावरण पूरे पूजन उत्सव के दौरान बस स्टॉप नुनेरा क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी समृद्ध परंपराओं को भी जीवित रखने का एक जरिया है।

​इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाएं उपस्थित रहीं और पूजा के पश्चात एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट कर पर्व की बधाई दी।

पाली/नुनेरा। बस स्टॉप नुनेरा क्षेत्र में आज वट सावित्री का पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। क्षेत्र की विवाहित महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष (बरगद) की विशेष पूजा-अर्चना की।

पारंपरिक विधि-विधान से हुई पूजा सुबह से ही पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं का वट वृक्ष के पास पहुंचना शुरू हो गया था। महिलाओं ने वट वृक्ष को जल अर्पित कर उस पर रोली, अक्षत, फल और फूल चढ़ाए। पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा की और अपने अखंड सौभाग्य की कामना की।

सुनी सावित्री-सत्यवान की कथा पूजा के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट सावित्री व्रत की कथा सुनी। कथा में बताया गया कि किस प्रकार सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत्य धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। इस पर्व को भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

भक्तिमय हुआ वातावरण पूरे पूजन उत्सव के दौरान बस स्टॉप नुनेरा क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी समृद्ध परंपराओं को भी जीवित रखने का एक जरिया है।

​इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाएं उपस्थित रहीं और पूजा के पश्चात एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट कर पर्व की बधाई दी।

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