डैम हादसा—मां-बेटे का दर्दनाक मौत देख दहल उठा दिल, थम गई सांसें, मगर मां की बाहों से जुदा न हो सका मासूम
जबलपुर/ बरगी डैम से सामने आई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं को भीतर तक हिला देने वाली कहानी बन गई है। शांत दिखने वाला पानी गुरुवार शाम अचानक तब तबाही में बदल गया, जब एक क्रूज नाव तेज तूफान और ऊंची लहरों के बीच संतुलन खोकर पलट गई।
नाव में सवार 43 लोगों की खुशियों भरी यात्रा कुछ ही पलों में चीख-पुकार में बदल गई। लहरें इतनी उग्र थीं कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस बीच जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी का दिल दहला दिया—एक मां, लाइफ जैकेट में लिपटी, अपने छोटे बेटे को सीने से ऐसे चिपकाए थी जैसे दुनिया की हर मुसीबत से बचा लेगी।
जब राहत दल ने घंटों की मशक्कत के बाद दोनों के शव पानी से बाहर निकाले, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मौत भी उस रिश्ते को अलग नहीं कर सकी—मां की बाहों में मासूम अब भी सुरक्षित था, मानो ममता ने आखिरी सांस तक हार नहीं मानी।
रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने तेज धार और चुनौतीपूर्ण हालात में लगातार प्रयास कर कई लोगों को बचाया, लेकिन इस दर्दनाक मंजर ने सबको झकझोर दिया। अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, 28 को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 6 लोग अब भी लापता हैं।
पर्यटन के लिहाज से लोकप्रिय यह क्रूज, जो वर्षों से सैलानियों को सैर कराता आ रहा था, उस दिन कुदरत के कहर के आगे बेबस नजर आया।
यह हादसा आंकड़ों से कहीं बढ़कर है—यह उस अटूट रिश्ते की गवाही है, जहां एक मां ने आखिरी पल तक अपने बच्चे को अपनी बाहों में थामे रखा।
और शायद यही वजह है कि यह मंजर अब हर देखने वाले की यादों में हमेशा के लिए बस गया है।

