श्रम योजनाओं में घोटाले की बू, हर काम के लिए तय रेट

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 श्रम योजनाओं में घोटाले की बू, हर काम के लिए तय रेट


बिलासपुर :- न्यायधानी बिलासपुर से एक बार फिर भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर सामने आई है, जहां गरीब श्रमिकों के हक पर डाका डालने का आरोप सीधे श्रम विभाग के कर्मचारियों पर लगा है। ताजा मामला उस वक्त सामने आया, जब एक अधिवक्ता ने जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल से लिखित शिकायत कर पूरे मामले का खुलासा किया।शिकायत के अनुसार, श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाएं- जैसे प्रसूति सहायता में 20 हजार रुपए, बेटियों की शिक्षा, विवाह और स्वरोजगार के लिए 20 हजार रुपए, और मृत्यु सहायता में 1 लाख रुपए।गरीब पंजीकृत श्रमिकों को देने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि इन योजनाओं का लाभ पाने के लिए मजदूरों से खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही है।बताया गया है कि विभाग में कार्यरत कर्मचारी स्वाती शर्मा, डंकेश्वर यादव, मनोहर पटेल और संदीप अंचल—पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन सुधार के नाम पर 100 से 500 रुपए तक की अवैध वसूली कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जो श्रमिक पैसे नहीं देते, उनके आवेदन बार-बार निरस्त कर दिए जाते हैं।


मामला यहीं नहीं रुकता। आरोप यह भी है कि योजनाओं के आवेदनों को स्वीकृत कराने के लिए दलालों का सहारा लिया जा रहा है। श्रम निरीक्षकों की जांच भी इन दलालों के जरिए कराई जाती है, जहां 5 हजार से लेकर 40 हजार रुपए तक की मांग की जाती है। यानी गरीब मजदूरों को अपने ही हक के पैसे के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि इन कर्मचारियों को विभागीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व में की गई शिकायतों पर भी आज तक कोई जवाब नहीं मिला।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाएगा, या फिर गरीब श्रमिक यूं ही योजनाओं के नाम पर आर्थिक शोषण का शिकार होते रहेंगे। फिलहाल सभी की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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