सांकरा वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई से विभाग कटघरे में
वन सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, वनकर्मियों की भूमिका पर भी चर्चा तेज
उत्तम साहू
नगरी। सांकरा वन परिक्षेत्र में एक बार फिर जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। गोरेगांव से भैसामुडा़ मार्ग के बीच अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की कटाई होने के बावजूद विभागीय अमला अनजान बना रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक फुदुरपानी क्षेत्र के कुछ ग्रामीण निजी उपयोग के नाम पर जंगल से पेड़ों की कटाई कर लकड़ी ले गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इस पूरे मामले में वन विभाग के ही एक कर्मचारी का नाम चर्चा में है। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, यदि वही लोग कटाई को संरक्षण देने लगें तो फिर वन संपदा को बचाना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि वन क्षेत्र में लंबे समय से छोटी-बड़ी अवैध कटाई होती रही है, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है।
यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर वन विभाग की गश्त व्यवस्था कहां थी? क्या बिना विभागीय जानकारी के इतनी आसानी से पेड़ों की कटाई संभव है? यदि विभाग सचमुच सतर्क होता तो जंगल में कुल्हाड़ी चलने से पहले ही कार्रवाई हो जाती।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि एक ओर शासन हरियाली बढ़ाने और जंगल बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई जंगलों के अस्तित्व को चुनौती दे रही है। पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांस हैं। ऐसे में जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत जंगलों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।
अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले में केवल खानापूर्ति करता है या फिर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई कर उदाहरण पेश करता है। फिलहाल सांकरा वन परिक्षेत्र में हुई इस कटाई ने वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

