मगरलोड तहसील का राजस्व चक्रव्यूह : पांच साल से सीमांकन के लिए दर-दर भटक रहा किसान

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मगरलोड तहसील का राजस्व चक्रव्यूह : पांच साल से सीमांकन के लिए दर-दर भटक रहा किसान

“पटवारी बीमार है, काम ज्यादा है” — बहानों की आड़ में दबा किसान का हक

 

               उत्तम साहू | मगरलोड

प्रदेश सरकार भले ही सुशासन, पारदर्शिता और सरलीकृत राजस्व व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन धमतरी जिले की मगरलोड तहसील में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां ग्राम मारागांव का एक किसान पिछले पांच वर्षों से अपनी ही जमीन का सीमांकन कराने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट घिसने को मजबूर है, लेकिन राजस्व अमला कुंभकर्णीय नींद से बाहर निकलने को तैयार नहीं है।

ग्राम मारागांव निवासी किसान रोशन दास ने अपनी कृषि भूमि खसरा नंबर 20, 66, 68 और 78 के सीमांकन के लिए 17 सितंबर 2020 को विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था। निर्धारित शासकीय शुल्क जमा करने के बावजूद फाइल वर्षों तक धूल खाती रही। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित किसान ने दोबारा 6 मई 2025 को नायब तहसीलदार न्यायालय मगरलोड में आवेदन और चालान की प्रतियां जमा कर न्याय की गुहार लगाई।

नायब तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक को सीमांकन के लिए आदेश भी जारी किया, लेकिन आदेश कागजों तक ही सीमित रह गया। मैदानी अमले ने कार्रवाई करने के बजाय “पटवारी की तबीयत खराब है”, “शासकीय कार्य में व्यस्तता है” जैसे घिसे-पिटे बहानों की ढाल बनाकर मामले को फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया।

सीमांकन नहीं, तो खेती भी संकट में

पांच वर्षों से लंबित इस मामले ने किसान की जिंदगी मुश्किलों में डाल दी है। जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट नहीं होने से मेढ़बंदी नहीं हो पा रही है। पड़ोसी किसानों के साथ विवाद बढ़ते जा रहे हैं और खेती-किसानी का काम प्रभावित हो रहा है।

हाथ में आवेदन, चालान और ज्ञापनों का पुलिंदा लेकर भटक रहे रोशन दास ने आखिरकार जिला कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। किसान का कहना है कि अगर समय रहते सीमांकन हो जाता तो आज उसे दर-दर भटकना नहीं पड़ता।

राजस्व अमले की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब न्यायालय से आदेश जारी हो चुका था तो आखिर पांच वर्षों तक सीमांकन क्यों नहीं किया गया? क्या राजस्व विभाग के अधिकारियों को किसानों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है?

और भी चौंकाने वाली बात यह है कि बिना ई-कोर्ट में प्रकरण दर्ज किए सीमांकन आदेश जारी कर दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत हुई? अगर हां, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

भखारा में निलंबन, मगरलोड में संरक्षण ?

कुछ सप्ताह पहले सीमांकन में लापरवाही के मामले में भखारा तहसील के एक राजस्व निरीक्षक पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। ऐसे में मगरलोड के इस गंभीर मामले में भी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

हालांकि संबंधित राजस्व निरीक्षक का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था और अब प्रकरण का अवलोकन कर जल्द निराकरण किया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यही है 
क्या मगरलोड में भी लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

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