छत्तीसगढ़ में महंगाई की मार, आम आदमी का बजट बिगड़ा
उत्तम साहू, धमतरी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब सीधे बाजार और घरेलू बजट पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और आयातित वस्तुओं की कीमतों में तेजी आने से पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, सब्जियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण सामग्री तक महंगी हो गई हैं।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन खर्च बढ़ा दिया है, जिसका असर रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर वस्तु पर पड़ रहा है। वहीं एलपीजी गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल, ढाबे और फूड कारोबारियों ने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। समोसा, कचौड़ी, दोसा और थाली जैसे सामान्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डेयरी उत्पाद भी महंगाई से अछूते नहीं हैं। दूध महंगा होने के बाद दही और पनीर के दामों में भी भारी उछाल आया है। कई बाजारों में पनीर 480 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। खाद्य तेलों में भी तेजी देखी जा रही है। सोया तेल 160 रुपए लीटर और राइस ब्रान तेल 155 रुपए लीटर तक पहुंच गया है।
महंगाई का असर अब निर्माण और उद्योग क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सीमेंट, सरिया, रेत और गिट्टी महंगी होने से मकान निर्माण लागत 1400 से 1500 रुपए प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई है। वहीं प्लास्टिक दाने और स्क्रैप महंगे होने से पैकिंग सामग्री और दैनिक उपयोग के प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में 20 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉपर और अन्य धातुओं के दाम बढ़ने से एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और बिजली के तार महंगे हो गए हैं। एसी की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक वृद्धि दर्ज की गई है। कपड़ा कारोबारियों के अनुसार कच्चे माल और आयात लागत बढ़ने से कपड़ों के दाम भी 20 से 25 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।
गर्मी और बढ़ते परिवहन खर्च का असर सब्जियों पर भी पड़ा है। टमाटर 50 रुपए किलो, फ्रेंच बींस 160 रुपए किलो और हरी मिर्च 80 रुपए किलो तक बिक रही है। नींबू, करेला और भिंडी जैसी सब्जियों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा, जिनके लिए घरेलू खर्च संभालना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

