4 साल के मासूम की हत्या, बेदर्द मां और 'इश्क' का खूनी खेल.. आरोपी गिरफ्तार

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 4 साल के मासूम की हत्या, बेदर्द मां और 'इश्क' का खूनी खेल.. आरोपी गिरफ्तार 



रायपुर/ एक तरफ 4 साल का मासूम मयंक, जिसे दुनिया की समझ तक नहीं थी। दूसरी तरफ उसकी मां, जिसकी उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा। लेकिन इस रिश्ते के बीच में मौजूद था एक तीसरा शख्स—जयदीप सिंह। एक ऐसा इंसान जिसके सिर पर अवैध संबंधों का भूत इस कदर सवार था कि उसने एक हंसते-खेलते बच्चे को अपनी हवस और चाहत के बीच का 'रोड़ा' समझ लिया।

  1 नवंबर 2025 वारदात की वो काली रात: 

आमानाका इलाके के एक मकान में उस दिन मासूम मयंक ने शायद कोई ऐसी जिद कर दी थी, जो उसकी मां के प्रेमी जयदीप को नागवार गुजरी। संबंध इतने गहरे और अंधे हो चुके थे कि जयदीप ने आव देखा न ताव, तकिया उठाया और मासूम का गला घोंटना शुरू कर दिया।

सबसे दर्दनाक सच: जब मासूम मयंक सांसों के लिए तड़प रहा था, उसकी सगी मां वहीं मौजूद थी। जिस मां की गोद में बच्चे का सबसे सुरक्षित ठिकाना होती है, वो ममता उस वक्त मूकदर्शक बनी तमाशा देखती रही। डॉक्टरों ने जब अस्पताल में मयंक को मृत घोषित किया, तो लगा कि यह एक हादसा है, लेकिन असल में यह एक सोची-समझी क्रूर हत्या थी।

 पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला 'मर्डर मिस्ट्री' का राज

शुरुआत में पुलिस इसे संदिग्ध मौत मानकर जांच कर रही थी। आरोपी और महिला को लगा कि वे कानून की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहे। लेकिन कहते हैं न कि *'अपराध चाहे कितना भी शातिराना हो, अपने पीछे सुराग छोड़ ही जाता है।'

जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट टेबल पर आई, पुलिस के भी होश उड़ गए। डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि बच्चे की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई है। केस डायरी पलटते ही हादसे की फाइल फौरन 'कत्ल के मुकदमे' में तब्दील हो गई।

 7 महीने की फरारी और 4 राज्यों का चक्कर: ऐसे दबोचा गया कातिल

हत्याकांड को अंजाम देने के बाद 27 वर्षीय आरोपी जयदीप सिंह फरार हो गया। पेशे से ट्रक ड्राइवर होने के कारण उसके लिए छिपना आसान था। वह लगातार पुलिस को चकमा देने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य ट्रक लेकर भागता रहा।

रायपुर पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए जाल बुना: आरोपी के मोबाइल और रूट पर लगातार नजर रखी गई।ट्रक ड्राइवरों के नेटवर्क में पुलिस ने अपने सूत्र सक्रिय किए। आमानाका पुलिस की एक स्पेशल टीम लगातार उसकी लोकेशन को ट्रैक कर रही थी।

 अंजाम: सलाखों के पीछे पहुंचा गुनहगार

आखिरकार, कानून के लंबे हाथों ने जयदीप की फरारी का अंत कर दिया। 10 जून 2026 को पुलिस ने घेराबंदी करके उसे धर दबोचा। पुलिसिया पूछताछ की सख्ती के आगे कातिल का हौसला टूट गया और उसने कबूल कर लिया कि हां, उसने ही मयंक को तड़पा-तड़पा कर मारा था, क्योंकि वह उसके और महिला के बीच आ रहा था।

अदालत ने आरोपी को सख्त लहजे में न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है। कानून अब इस बेरहम कातिल को उसके किए की सजा देगा, लेकिन समाज के जेहन में यह सवाल हमेशा जिंदा रहेगा कि कोई मां इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती है?


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