वाहन बेचकर भी नहीं छूटी जिम्मेदारी! बोलेरो हादसे में आरक्षक की मौत पर पुराने मालिक को भरने होंगे 63.93 लाख रुपये
बिलासपुर। अगर आपने अपना वाहन बेच दिया है, लेकिन उसका नामांतरण (ट्रांसफर) नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए चेतावनी है। वाहन बेचने के वर्षों बाद भी एक व्यक्ति को सड़क हादसे की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने एक मामले में पुराने वाहन मालिक को करीब 63.94 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, जबकि दुर्घटना के समय वाहन उसके कब्जे में नहीं था।
मामला वर्ष 2019 का है। जांजगीर-चांपा जिले के पुटपुरा मुख्य द्वार के पास ड्यूटी पर मौजूद आरक्षक प्रमोद वर्मा को एक तेज रफ्तार बोलेरो ने टक्कर मार दी थी। गंभीर रूप से घायल आरक्षक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
घटना के बाद मृतक आरक्षक की पत्नी मनीषा वर्मा ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे का दावा प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान बोलेरो के पुराने मालिक दिवाकर पाण्डेय ने दलील दी कि उन्होंने दुर्घटना से काफी पहले वाहन बेच दिया था और नोटरी के माध्यम से बिक्रीनामा भी कराया था।
हालांकि अधिकरण ने माना कि वाहन का नाम परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में अब भी दिवाकर पाण्डेय के नाम पर दर्ज था। ऐसे में कानून की नजर में वही वाहन स्वामी माने जाएंगे। अधिकरण की पीठासीन अधिकारी श्रुति दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल नोटरी से वाहन बेच देने भर से जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। जब तक आरसी बुक में नामांतरण नहीं होता, दुर्घटना की स्थिति में कानूनी जवाबदेही पुराने मालिक की ही बनी रहती है।
अधिकरण ने मृतक आरक्षक के परिवार को 63 लाख 93 हजार 992 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही कुल राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा मृतक के माता-पिता के बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है इस फैसले का संदेश?
यह फैसला उन हजारों वाहन मालिकों के लिए सबक है जो वाहन बेचने के बाद सिर्फ स्टांप या नोटरी के आधार पर सौदा पूरा मान लेते हैं। कानूनी रूप से वाहन की जिम्मेदारी तभी समाप्त होती है, जब परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज हो जाए। अन्यथा किसी भी दुर्घटना, अपराध या कानूनी विवाद की स्थिति में पुराने मालिक को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

