बसिबार पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों का विस्फोट, उपसरपंच समेत पंचों ने खोला मोर्चा
SDM पाली को सौंपा शिकायत पत्र, वित्तीय अनियमितताओं और राशन वितरण में गड़बड़ी की जांच की मांग
पाली/कोरबा। ग्राम पंचायत बसिबार में विकास कार्यों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पंचायत के उपसरपंच सहित कई पंचों ने सरपंच और सचिव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाली को लिखित शिकायत सौंपकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नाली निर्माण में दोहरी स्वीकृति का आरोप
शिकायत पत्र के अनुसार, पंचायत में एक नाली निर्माण कार्य के लिए पहले ही लगभग 1.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत और आहरित की जा चुकी थी तथा कार्य की नींव खुदाई भी कर दी गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद उसी कार्य को दोबारा 15वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत कर करीब 2 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि निकाल ली गई। पंचों का कहना है कि यह शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
PDS भवन निर्माण और राशन वितरण पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली भवन निर्माण में गुणवत्ता संबंधी अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा ग्रामीणों को मिलने वाले राशन में भी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि प्रति राशन कार्ड एक-एक किलो चावल कम वितरित किया गया, जिससे हितग्राहियों में नाराजगी व्याप्त है।
सरपंच पति पर हस्तक्षेप का आरोप
पंचों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि सरपंच पति सुरभवन सिंह पंचायत के कार्यों में सक्रिय हस्तक्षेप करते हैं और सचिव पर दबाव बनाकर प्रस्ताव पारित कराते हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में फर्जी प्रस्तावों के आधार पर राशि आहरित की गई है। शिकायतकर्ताओं ने जांच पूरी होने तक सरपंच और सचिव के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने की मांग की है।
कई जनप्रतिनिधियों ने किया हस्ताक्षर
शिकायत पत्र पर उपसरपंच देवेंद्र कुमार सहित गीता बाई कंवर, अंजली आर्मो, भगवती कंवर, पार्वती यादव, नंदनी देवी, सूर्यभवन कंवर, संतोषी बाई गांडा, कविता कंवर, अहिल्या बाई, अजय कुमार और संजय कुमार के हस्ताक्षर हैं।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत बसिबार में लगे इन गंभीर आरोपों के बाद अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं दूसरी ओर मामले में सरपंच और सचिव का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

