राजस्व न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, बाबू प्रथा एवं दलाल तंत्र पर रोक लगाने की मांग

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राजस्व न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, बाबू प्रथा एवं दलाल तंत्र पर रोक लगाने की मांग

मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व मंत्री एवं राजस्व सचिव को अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने भेजा ज्ञापन



उत्तम साहू,धमतरी,23 जून 2026। राज्य विधिज्ञ परिषद छत्तीसगढ़ के सदस्य एवं अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व मंत्री एवं राजस्व सचिव को पत्र प्रेषित कर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, बाबू प्रथा एवं दलाल तंत्र पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा राजस्व कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

अपने ज्ञापन में अधिवक्ता साहू ने कहा है कि प्रदेश के अनेक तहसील, नायब तहसीलदार, एसडीएम, अपर कलेक्टर एवं कलेक्टर न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आम नागरिकों, किसानों एवं भूमिधारकों को न्याय प्राप्त करने में अनावश्यक विलंब, अभिलेखीय अनियमितताओं, बार-बार स्थगन तथा कथित भ्रष्टाचार के कारण गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर न्यायालयीन प्रक्रिया में बाबू प्रथा एवं दलाल तंत्र का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे पारदर्शिता एवं निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। न्यायालयीन कार्यवाही को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।

अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने मांग की है कि प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों की विशेष जांच कराई जाए, न्यायालय परिसरों में दलालों की गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, सीसीटीवी एवं डिजिटल रिकॉर्डिंग की व्यवस्था लागू की जाए तथा प्रकरणों की स्थिति, आदेश एवं कार्यवाही को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए।


उन्होंने यह भी मांग की है कि न्यायालयों द्वारा जारी मेमो, नोटिस एवं अन्य आदेशों की प्रतियां संबंधित अधिवक्ताओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं तथा अधिवक्ता नियुक्त होने की स्थिति में महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो सके।

ज्ञापन में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की शिकायतों के लिए स्वतंत्र हेल्पलाइन, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल तथा राज्य स्तरीय निगरानी समिति के गठन की भी मांग की गई है।


अधिवक्ता साहू ने कहा कि राजस्व न्यायालय आम जनता के भूमि एवं संपत्ति संबंधी अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए इन संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करना राज्य शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय में शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है ताकि आम नागरिकों का विश्वास राजस्व प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था में और अधिक सुदृढ़ हो सके।



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