गायत्री मंत्र क्यों है सर्वश्रेष्ठ? सद्बुद्धि, सफलता और संस्कार का आधार है गायत्री मंत्र : सुरेश कुमार साहू
गायत्री साधना से निखरता है व्यक्तित्व, बढ़ती है सकारात्मक सोच
उत्तम साहू,नगरी। गायत्री परिवार से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता सुरेश कुमार साहू (पुरानी बस्ती, नगरी) द्वारा लिखे गए एक चिंतनपरक लेख में “गायत्री मंत्र को प्राथमिकता क्यों?” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। लेख में गायत्री मंत्र को मानव जीवन के सर्वांगीण विकास, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आधार बताया गया है।
लेख के अनुसार गायत्री मंत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि मानव की बुद्धि को परिष्कृत एवं जागृत करने वाली दिव्य प्रार्थना है। इसमें कहा गया है कि नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप करने से मन में सकारात्मकता का संचार होता है तथा जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
लेख में प्राथमिकता के सिद्धांत को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए बताया गया है कि जिस प्रकार जीवन में वायु, जल और अन्न का अपना-अपना महत्व है, उसी प्रकार आध्यात्मिक और बौद्धिक उन्नति के लिए गायत्री मंत्र का विशेष स्थान है। मानव जीवन में धन-संपत्ति से अधिक सद्बुद्धि और समझदारी की आवश्यकता होती है, क्योंकि सही बुद्धि होने पर व्यक्ति उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग कर सकता है।
सुरेश कुमार साहू ने अपने लेख में उल्लेख किया है कि गायत्री का अर्थ ही सद्बुद्धि और विवेक से जुड़ा हुआ है। सद्बुद्धि के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को सफल, संतुलित और समाजोपयोगी बना सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य के पास अपार संपत्ति हो, लेकिन बुद्धि और विवेक का अभाव हो, तो वह संसाधनों का सही उपयोग नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत सद्बुद्धि वाला व्यक्ति सीमित साधनों में भी सम्मान और सफलता प्राप्त कर सकता है।
लेख के अंत में गायत्री मंत्र को मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने का आह्वान किया गया है। लेखक का मानना है कि गायत्री साधना व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक विकास और समाज कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

