एक ही परिवार के चार सदस्यों की अर्थियां एक साथ उठीं,पूरा गांव सन्नाटे में डूब गया
दुर्ग। कुछ हादसे सिर्फ लोगों की जान नहीं लेते, बल्कि पूरे गांव की खुशियां, सपने और यादें भी अपने साथ ले जाते हैं। दुर्ग जिले के कुथरेल गांव में मंगलवार का दिन ऐसा ही दर्द लेकर आया, जब एक ही परिवार के चार सदस्यों की अर्थियां एक साथ उठीं और चार चिताएं एक साथ जल उठीं। यह दृश्य देखकर हर आंख नम हो गई और पूरा गांव सन्नाटे में डूब गया।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 29 मई की रात हुए भीषण सड़क हादसे में कुथरेल निवासी आईटी इंजीनियर अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची चंद्राकर और दोनों मासूम बेटे दर्श व अक्षज की दर्दनाक मौत हो गई। परिवार बच्चों की ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद घूमने निकला था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
बताया गया कि कालावन क्षेत्र के पास टैक्सी अचानक अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और उसमें सवार सभी आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में दूसरे परिवार के पी.जी. कार्तिघायन, उनकी पत्नी मनीमाला, पुत्र नंदन और टैक्सी चालक भी शामिल हैं।
मंगलवार दोपहर जब चार एंबुलेंसों में अरविंद चंद्राकर और उनके परिवार के शव गांव पहुंचे, तो पूरा कुथरेल उमड़ पड़ा। जिन बच्चों की किलकारियों से कभी घर और गांव गूंजता था, आज उन्हीं की अंतिम यात्रा निकली। मां, पिता और दो बेटों की चार अर्थियां एक साथ देखकर लोगों का कलेजा फट पड़ा। महिलाओं की सिसकियां और परिजनों का विलाप माहौल को और भी गमगीन बना रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के इतिहास में पहली बार ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जब एक ही परिवार के चार सदस्यों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। श्मशान घाट में जलती चार चिताएं मानो हर किसी से यह सवाल पूछ रही थीं कि आखिर एक पल में इतनी खुशियां कैसे उजड़ गईं।
हादसे के बाद खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाके के कारण राहत एवं बचाव कार्य भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने ह्यूमन चेन बनाकर गहरी खाई से शवों को बाहर निकाला। जीपीएस लोकेशन के आधार पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पता लगाया गया, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया।
कुथरेल गांव में आज भी हर गली, हर चौपाल और हर घर में उसी हादसे की चर्चा है। लोग स्तब्ध हैं, क्योंकि जिसने भी अरविंद और उनके परिवार को देखा था, वह उनके खुशहाल जीवन और बच्चों की मुस्कान को कभी नहीं भूल पाएगा। एक पल में पूरा परिवार खत्म हो जाने की यह त्रासदी लंबे समय तक लोगों के दिलों में दर्द बनकर जिंदा रहेगी।
चार चिताओं की लपटों के साथ सिर्फ चार जिंदगियां नहीं, बल्कि एक परिवार के अनगिनत सपने भी राख हो गए।

