प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत होगी : प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा
संबलपुर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं कृषि मेले का आयोजन, किसानों को किया गया जागरूक
उत्तम साहू,धमतरी, 17 जून 2026। राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और आत्मनिर्भर किसान की आधारशिला है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति संरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ खाद्यान्न मिल सके।
संबलपुर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र के समीप आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं कृषि मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और गांव इसकी आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि पहले की कृषि व्यवस्था प्रकृति और पशुधन आधारित थी, जिससे उत्पादन के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहता था। वर्तमान में रासायनिक खेती के बढ़ते प्रभाव से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, ऐसे में प्राकृतिक खेती समय की जरूरत बन गई है।
कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री ने किसानों को कृषि उपकरण, बीज मिनीकिट एवं पौधों का वितरण किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने ग्रामीणों की मांग पर आमदी में सरस्वती शिशु मंदिर भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये तथा संबलपुर में किसान कुटी निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खाद निर्माण और उन्नत कृषि तकनीकों के संबंध में सतत मार्गदर्शन देने के निर्देश भी दिए।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम साहू ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती पर शोध और प्रदर्शन कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि गौ आधारित कृषि प्रणाली प्राकृतिक खेती की रीढ़ है तथा गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक उत्पाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम करते हैं।
उप संचालक कृषि श्री मोनेश साहू ने बताया कि जिले में 1 जून से 30 जून तक "खेत बचाओ अभियान" संचालित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और हरित खाद के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
कार्यक्रम में जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष श्री रोहिताश मिश्रा ने किसानों को प्राकृतिक, विषमुक्त एवं जहरमुक्त खेती अपनाने की शपथ दिलाई। कृषि विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत, जैविक खाद निर्माण तथा कृषि लागत कम करने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। किसानों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्राकृतिक खेती से जुड़े नवाचारों और सफल प्रयोगों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री अरुण सार्वा, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू निषाद, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अंगीरा ध्रुव, श्रीमती लक्ष्मी साहू, श्री बालाराम साहू, कृषि विशेषज्ञ श्री प्रताप राव कृदत्त, किसान नेता श्री ठाकुर राम वर्मा, श्री शशि पवार सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे। इस दौरान मंत्री श्री वर्मा को किसानों द्वारा स्मृति चिन्ह स्वरूप पारंपरिक हल भेंट किया गया।




