वादों का पुल कागजों में, किसानों ने खुद संभाली जिम्मेदारी: महानदी पर श्रमदान से बना रहे वैकल्पिक मार्ग
उत्तम साहू
नगरी। नगर पंचायत नगरी द्वारा पुरानी बस्ती क्षेत्र में महानदी पर पुल निर्माण की घोषणा किए जाने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि पुल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होने के कारण ग्रामीणों और किसानों को अपनी समस्या का समाधान स्वयं करना पड़ रहा है।
खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण मौसम में नदी के दोनों ओर स्थित खेतों तक पहुंचने में दिक्कतें बढ़ गई हैं। किसानों का कहना है कि पुल नहीं होने से कृषि कार्य, खाद-बीज और अन्य आवश्यक सामग्री के परिवहन में लगातार बाधा उत्पन्न हो रही है। ऐसे में मजबूरीवश ग्रामीणों ने स्वयं के श्रम और आर्थिक सहयोग से नदी पर वैकल्पिक पुल तैयार करने का बीड़ा उठाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, यदि समय रहते स्थायी पुल का निर्माण हो जाता तो उन्हें इस प्रकार की अस्थायी व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। किसानों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और नगर पंचायत द्वारा पुल निर्माण को लेकर कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कार्य प्रारंभ नहीं होने से लोगों में निराशा बढ़ रही है।
वर्तमान में पन्नालाल साहू, हीरालाल साहू, मन्नू साहू, छोटेलाल साहू, पवन किरण साहू सहित अन्य कृषक एकजुट होकर श्रमदान के माध्यम से वैकल्पिक पुल निर्माण में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का यह प्रयास क्षेत्र में सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर सामने आया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर पंचायत से मांग की है कि स्वीकृत पुल निर्माण कार्य को जल्द से जल्द प्रारंभ कराया जाए, ताकि किसानों और आम नागरिकों को स्थायी एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों की घोषणाएं तभी सार्थक होंगी, जब उनका लाभ समय पर आम जनता तक पहुंचे।


