बनरौद में कथित अवैध वसूली का मामला,कृषि अधिकारी बनकर वाहन रोकने और 1000 रुपये ऑनलाइन लेने का आरोप,
उर्वरक निरीक्षक ने केरेगांव थाने में की लिखित शिकायत
उत्तम साहू
नगरी/धमतरी। धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के ग्राम बनरौद में एक कृषि दुकान से जुड़े कथित अवैध वसूली के मामले ने क्षेत्र में हलचल मचा दी है। मामला एक वायरल ऑडियो और ऑनलाइन भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने स्वयं को कृषि अधिकारी बताकर खाद एवं कृषि दवाइयां लेकर जा रहे पिकअप वाहन को रोका और वाहन छोड़ने के एवज में कथित रूप से 1,000 रुपये की मांग की। हालांकि, वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जानकारी के अनुसार, 10 जुलाई की रात धमतरी स्थित राजेश ट्रेडर्स से कविता कृषि केंद्र के लिए खाद एवं कृषि दवाइयां लेकर एक पिकअप वाहन बनरौद की ओर जा रहा था। बताया जा रहा है कि बनरौद रेस्ट हाउस के पास एक किराना दुकान के समीप एक व्यक्ति ने वाहन को रोककर चालक से दस्तावेजों की जांच की। चालक के अनुसार, उस समय उसके पास बिल उपलब्ध नहीं था और बिल व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा जाना था।
बताया गया कि करीब एक घंटे बाद दुकानदार को ऑनलाइन बिल भेज दिया गया, इसके बावजूद वाहन को कथित रूप से आगे जाने नहीं दिया गया। इसी दौरान वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति द्वारा वाहन चालक के मोबाइल से दुकानदार से बातचीत करते हुए स्वयं को अधिकारी बताया जाना सुनाई दे रहा है। आरोप है कि बातचीत के दौरान वाहन छोड़ने के एवज में पैसों की मांग की गई।
क्यूआर कोड भेजकर 1000 रुपये लेने का आरोप
आरोप के अनुसार, नकद राशि उपलब्ध नहीं होने पर एक क्यूआर कोड भेजा गया। इसके बाद रात करीब 12 बजकर 14 मिनट पर यश कुमार साहू नामक खाते में 1,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि भुगतान के बाद ही वाहन को आगे जाने दिया गया।
उर्वरक निरीक्षक ने केरेगांव थाने में की लिखित शिकायत
मामले को लेकर उर्वरक निरीक्षक द्वारा केरेगांव थाने में लिखित शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत के बाद अब पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान वायरल ऑडियो, ऑनलाइन भुगतान, वाहन की आवाजाही और कथित रूप से अधिकारी बनकर बातचीत करने वाले व्यक्ति की पहचान जैसे बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है।
जांच नाका कर्मचारियों ने घटना से अनभिज्ञता जताई
मामले की जानकारी मिलने के बाद मीडिया टीम बनरौद स्थित वनोपज जांच नाका पहुंची। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें किसी कथित अधिकारी के आने, वाहन चालक से बातचीत करने या किसी प्रकार की वसूली की जानकारी नहीं है। कर्मचारियों के अनुसार, यदि घटना हुई है तो यह जांच नाका के कर्मचारियों की जानकारी के बिना हुई होगी।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं किसी अज्ञात व्यक्ति ने जांच नाका या विभागीय अधिकारी का नाम लेकर कथित रूप से वाहन रोककर वसूली तो नहीं की।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर कौन था वह कथित अधिकारी?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह व्यक्ति कौन था, जिसने स्वयं को कृषि अधिकारी बताकर वाहन चालक और दुकानदार से बातचीत की? यदि वह वास्तव में कोई शासकीय अधिकारी था, तो उसकी पहचान क्या है और उसने किस अधिकार के तहत वाहन को रोका? वहीं, यदि वह अधिकारी नहीं था, तो फिर उसने अधिकारी बनकर कथित रूप से वाहन रोकने और पैसे लेने का प्रयास कैसे किया?
फिलहाल वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उर्वरक निरीक्षक की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो चुकी है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला वास्तव में किसी अधिकारी द्वारा की गई कथित अवैध वसूली का है या फिर किसी व्यक्ति द्वारा अधिकारी बनकर की गई धोखाधड़ी का। जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले का वास्तविक खुलासा हो सकेगा।

