रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW की रिमांड पर
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक रामगोपाल अग्रवाल ने 3 साल बाद आखिरकार सरेंडर कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने बुधवार को रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के दफ्तर पहुंचकर आत्मसमर्पण किया।
गुरुवार को EOW की टीम ने उनकी मेडिकल जांच कराने के बाद उन्हें रायपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है।
करोड़ों रुपयों के लेन-देन का खुलासा: कांग्रेस भवन से जुड़े तार
EOW के दावों के अनुसार, इस पूरे घोटाले के तार सीधे कांग्रेस भवन से जुड़े हुए हैं:
कोयला लेवी घोटाला: जांच के दौरान सूर्यकांत तिवारी के पास से जब्त की गई डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्री पाई गई है। EOW का दावा है कि यह रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से ही कांग्रेस भवन तक पहुंची थी।
शराब घोटाला: एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाला केस में अनवर ढेबर और उसके लोगों ने करोड़ों रुपये कांग्रेस भवन में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे।
कस्टम मिलिंग केस: इस मामले में भी रोशन चंद्राकर द्वारा करोड़ों रुपये कांग्रेस भवन में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाने का दावा किया गया है।
इन मुख्य बिंदुओं पर होगी पूछताछ
EOW की टीम रिमांड के दौरान रामगोपाल अग्रवाल से मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर पूछताछ करेगी:
घोटाले के पैसे कहां से आए, किसने पहुंचाए, किसने लिए और उनका इस्तेमाल कहां हुआ?
संबंधित व्यक्तियों से उनके संपर्क और वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा।
धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग की पूरी कड़ियों को जोड़ना।
यह पूरी जांच और पूछताछ जब्त डायरी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अब तक विवेचना के दौरान जुटाई गई अन्य सामग्रियों के आधार पर की जा रही है।
बेटे वैभव अग्रवाल से भी लंबी पूछताछ
रामगोपाल अग्रवाल के सरेंडर से पहले, EOW ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार 2 दिनों तक लंबी पूछताछ की है। अधिकारियों ने वैभव से रामगोपाल अग्रवाल के पिछले 3 सालों के ठिकानों, उनके आर्थिक लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े कई तीखे सवाल किए।
घोटाले की कुल राशि और आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल का नाम छत्तीसगढ़ के तीन बड़े घोटालों में सामने आया है:
1. शराब घोटाला:करीब 3,000 करोड़ का कथित घोटाला।
2. कोल लेवी वसूली मामला: करीब 450 करोड़ का घोटाला।
3. कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला: करीब 127 करोड़ का घोटाला।
वर्तमान में जांच एजेंसियां इन सभी मामलों में कथित धन के प्रवाह (मनी ट्रेल), इसके अंतिम लाभार्थियों और कमीशन के पूरे नेटवर्क की गहनता से पड़ताल कर रही हैं। रिमांड के दौरान इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

