स्पॉन संवर्धन योजना से बदली हरिश्चंद्र जांगड़े की तस्वीर, 23 लाख मछली बीज से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
उत्तम साहू
धमतरी, 29 जुलाई 2026। शासन की स्पॉन संवर्धन योजना जिले के मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित इस योजना के तहत ग्राम पंचायत चरमुडिया के मत्स्य पालक हरिश्चंद्र जांगड़े को शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, सांकरा में 23 लाख स्पॉन (जीरा आकार के मछली बीज) वितरित किए गए। इससे उनके मत्स्य पालन व्यवसाय को नई गति मिलने के साथ आय बढ़ने की उम्मीद है।
गुणवत्तापूर्ण बीज से बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत
हरिश्चंद्र जांगड़े लंबे समय से मत्स्य पालन से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि पहले निजी स्रोतों से महंगे दामों पर मछली बीज खरीदना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ जाती थी और गुणवत्तापूर्ण बीज भी हमेशा उपलब्ध नहीं हो पाता था। अब शासन की योजना के माध्यम से प्रमाणित एवं स्वस्थ मछली बीज मिलने से उत्पादन लागत कम होगी और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
वैज्ञानिक पद्धति से होगा संवर्धन
मत्स्य विभाग के अनुसार वितरित किए गए 23 लाख स्पॉन का वैज्ञानिक तरीके से संवर्धन कर उन्हें फिंगरलिंग एवं उन्नत मत्स्य बीज के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे जिले में गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की उपलब्धता बढ़ेगी और आसपास के मत्स्य पालकों को भी समय पर बीज मिल सकेगा। इससे मत्स्य उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
30 हजार रुपए तक की सहायता
योजना के तहत मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन कर मत्स्य बीज उत्पादन एवं विक्रय के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र हितग्राहियों को स्पॉन संवर्धन, तालाब सुधार एवं आवश्यक इनपुट्स के लिए 30 हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
मत्स्य पालन बना लाभकारी उद्यम
हरिश्चंद्र जांगड़े का कहना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन ने मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय का स्वरूप दे दिया है। उनका लक्ष्य भविष्य में मत्स्य बीज उत्पादन का विस्तार करना और अन्य किसानों व युवाओं को भी इस क्षेत्र से जोड़ना है।
आत्मनिर्भर मत्स्य उत्पादन की दिशा में पहल
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्पॉन संवर्धन योजना का उद्देश्य केवल मछली बीज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन की आत्मनिर्भर व्यवस्था विकसित करना है। इसके लिए हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक पालन पद्धति और समय-समय पर आवश्यक सलाह भी दी जाती है।
हरिश्चंद्र जांगड़े ने इस योजना के लिए राज्य शासन और मत्स्य विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली है। उन्हें विश्वास है कि गुणवत्तापूर्ण मछली बीज के माध्यम से वे बेहतर उत्पादन कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे तथा अन्य मत्स्य पालकों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।
स्पॉन संवर्धन योजना की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जनहितकारी योजनाएं समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचें तो वे ग्रामीण आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती हैं। धमतरी जिले में यह प्रयास आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समृद्ध मत्स्य पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

