सरकारी योजना ने बदली पशुपालक की तकदीर, बकरी पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े अश्वनी ध्रुव
नेशनल लाइवस्टॉक मिशन से साकार हुआ आत्मनिर्भरता का सपना, 20 लाख की इकाई पर मिला 50 प्रतिशत अनुदान
उत्तम साहू,धमतरी, 19 जुलाई 2026। कृषि के साथ पशुपालन को आय का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की नेशनल लाइवस्टॉक मिशन योजना जिले के पशुपालकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। योजना के तहत धमतरी जिले में 3 बकरी पालन इकाइयों और 2 मुर्गी पालन इकाइयों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें विकासखंड धमतरी के ग्राम भटगांव निवासी प्रगतिशील पशुपालक श्री अश्वनी ध्रुव की बकरी पालन इकाई ग्रामीण स्वरोजगार और वैज्ञानिक पशुपालन का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।
श्री अश्वनी ध्रुव ने ग्राम विश्रामपुर में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बकरी पालन इकाई स्थापित की है। इकाई के लिए उन्होंने 100 उन्नत नस्ल की बकरियों और 5 बकरों का क्रय किया है। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत यानी 10 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। प्रथम किस्त के रूप में 5 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हो चुकी है। पशुओं के क्रय, स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा संबंधी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद द्वितीय किस्त जारी की जाएगी।
योजना के प्रावधानों के अनुसार पशुधन का बीमा अनिवार्य है। इसी क्रम में 17 जुलाई 2026 को पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. अवधेश कुमार मरकाम, विकासखंड धमतरी के डॉ. सुरेंद्र कुमार मरकाम, उपसंचालक कार्यालय के डॉ. प्रमोद ठाकुर तथा बजाज इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सभी बकरियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका बीमा कराया गया। पशुओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी श्री प्रेम लाल साहू द्वारा टैगिंग भी की गई।
इस दौरान पशुपालक को बकरी पालन के वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित पोषण, टीकाकरण, रोग नियंत्रण, प्रजनन प्रबंधन और स्वच्छ पशुशाला संचालन के संबंध में विस्तृत तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विभाग द्वारा आवश्यक औषधियां उपलब्ध कराते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और निरंतर तकनीकी सहयोग का भरोसा भी दिलाया गया।
आसपास के पशुपालकों को भी मिलेगा लाभ
इस परियोजना की खास बात यह है कि इकाई में उपलब्ध उन्नत नस्ल के बकरों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को भी नस्ल सुधार का लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय बकरियों की उत्पादकता बढ़ने, बकरी के बच्चों की गुणवत्ता में सुधार आने और पशुपालकों की आय में दीर्घकालिक वृद्धि की उम्मीद है।
श्री अश्वनी ध्रुव की यह पहल क्षेत्र में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और किसानों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करेगी। जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक पशुपालकों को शासन की योजनाओं से जोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाने और पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।
अश्वनी ध्रुव की सफलता इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और पशुपालकों की मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकते हैं।


