लाखों रुपए खर्च, फिर भी अधूरा जनपद भवन! नगरी जनपद सीईओ के दावों पर उठे सवाल
6 महीने से चल रहा मरम्मत कार्य अब तक अधूरा, लटकते बिजली तार, अधूरी पेंटिंग, बंद हाईमास्ट लाइट और बंद पड़ी महिला समूह की कैंटीन बनी व्यवस्था पर सवाल
उत्तम साहू,नगरी। जनपद पंचायत नगरी भवन के मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 26 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद छह महीने बाद भी भवन अधूरा नजर आ रहा है। अधूरी पेंटिंग, उखड़ा प्लास्टर, खुले और लटकते बिजली के तार, महीनों से बंद हाईमास्ट लाइट तथा मरम्मत के कारण प्रभावित महिला स्व-सहायता समूह की कैंटीन ने पूरे कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, उसकी वर्तमान स्थिति सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। भवन के पीछे कई हिस्सों में अब भी डेंटिंग-पेंटिंग का कार्य अधूरा है, जबकि सामने खुले बिजली के तार सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मरम्मत कार्य छह महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ तो निर्माण एजेंसी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या विभाग ने समय-सीमा का पालन सुनिश्चित कराया या फिर केवल आश्वासन ही दिए जाते रहे?
इधर, जनपद परिसर में लगी हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद हैं। इस पर जब जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोहित बोर्झा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि लाइटें तकनीकी रूप से ठीक हैं, लेकिन बिजली बिल अधिक आने के कारण उन्हें नियमित रूप से नहीं जलाया जा रहा है।
सीईओ का यह बयान भी कई सवाल खड़े करता है। जब सार्वजनिक सुविधा के लिए सरकारी राशि से हाईमास्ट लाइटें लगाई गईं, तो क्या उन्हें केवल सजावट के लिए स्थापित किया गया था? यदि बिजली बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है, तो फिर ऐसी व्यवस्था का औचित्य क्या है?
मरम्मत कार्य का सबसे अधिक असर जनपद परिसर में संचालित महिला स्व-सहायता समूह की कैंटीन पर पड़ा। लंबे समय तक कैंटीन बंद रहने से समूह की महिलाओं की नियमित आय प्रभावित हुई और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। महिलाओं का कहना है कि यदि कार्य तय समय में पूरा हो जाता, तो उनका रोजगार प्रभावित नहीं होता।
विभागीय इंजीनियर का कहना है कि मरम्मत कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और शेष कार्य जल्द पूरा करा दिया जाएगा। वहीं स्थानीय नागरिकों की मांग है कि 26 लाख रुपये के इस कार्य की तकनीकी एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण गुणवत्ता की समीक्षा हो और यदि कहीं अनियमितता या लापरवाही मिली है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनपद पंचायत नगरी का अधूरा भवन आखिर कब पूरा होगा और लाखों रुपये के इस कार्य पर उठ रहे सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारी कब देंगे।

