वन सुरक्षा समिति अध्यक्ष पर अवैध कटाई कराने के आरोप, 11 आरोपी गिरफ्तार
आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 78 में अवैध कटाई का मामला, 2.353 घनमीटर लकड़ी और कटाई में प्रयुक्त औजार जब्त
उत्तम साहू
धमतरी/सिंगपुर। जंगलों की सुरक्षा और अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग लगातार अभियान चला रहा है, लेकिन धमतरी वनमंडल के सिंगपुर रेंज से सामने आया मामला वन सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर रहा है। आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 78 में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई करते हुए वन विभाग की टीम ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप ग्राम कमईपुर निवासी फजलू रहमान पिता हुसैन खान, जो वन सुरक्षा समिति का अध्यक्ष बताया गया है, पर लगाए जा रहे हैं। बताया गया है कि अवैध कटाई के मामले में उसे मुख्य सरगना माना जा रहा है। कार्रवाई की भनक लगने के बाद फजलू रहमान घर में ताला लगाकर फरार बताया जा रहा है। वन सुरक्षा समिति का उद्देश्य जंगलों की रक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, ऐसे में समिति के अध्यक्ष पर ही आरक्षित वन में कटाई करवाने के आरोप लगना पूरे मामले को गंभीर बना देता है।
37 नग लकड़ी और 2.353 घनमीटर वन संपदा जब्त
वन विभाग की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से मोयन, सेम्हल सहित अन्य प्रजातियों के कुल 37 नग लकड़ी, जिसका अनुमानित आयतन 2.353 घनमीटर बताया गया है, जब्त की गई। इसके अलावा कटाई में इस्तेमाल किए जा रहे 4 कुल्हाड़ी, 2 पेटटुथ आरा, 10 फीट का एक टेप, एक मोबाइल फोन और 4 मोटरसाइकिल भी जब्त की गई हैं।
वन विभाग के अनुसार सभी आरोपी आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटाई करते हुए लकड़ी के साथ पकड़े गए। कार्रवाई के बाद जब्त वन संपदा और औजारों को वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है।
कोंडागांव क्षेत्र से जुड़े हैं अधिकांश आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में उमेश चक्रधारी, राजेन्द्र सगर, राजेश कुमार, सुकदेव मरकाम, जय राम, चैतराम मरकाम, सुनील मरकाम, बिसनाथ मरकाम, सहदेव मरकाम, जुगदेव और मिनेश मंडावी शामिल हैं। इनमें अधिकांश आरोपी पीड़ापाल, बांसकोट क्षेत्र, जिला कोंडागांव से संबंधित बताए गए हैं। वन विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए सभी को हिरासत में लिया।
वन सुरक्षा समिति पर उठे सवाल
सरकार और वन विभाग की ओर से जंगलों की सुरक्षा के लिए विभिन्न वन क्षेत्रों में वन सुरक्षा समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सहभागिता से जंगलों को अवैध कटाई, अतिक्रमण और अन्य वन अपराधों से बचाना है। लेकिन सिंगपुर रेंज के इस मामले में समिति के अध्यक्ष पर ही अवैध कटाई कराने का आरोप लगने से वन सुरक्षा समिति की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहेगा कि आरक्षित वन क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर कटाई की गतिविधियां कब से चल रही थीं और इसमें फजलू रहमान की कथित भूमिका कितनी थी। वन विभाग द्वारा फरार बताए जा रहे समिति अध्यक्ष की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज
वन विभाग के अनुसार आरोपियों का कृत्य भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26(1) के संबंधित प्रावधानों तथा धारा 52 के अंतर्गत वन अपराध की श्रेणी में आता है। मामले में आवश्यक जांच और विवेचना जारी है। वन विभाग ने अपराध की गंभीरता, जब्त वन संपदा और शेष विवेचना को देखते हुए आरोपियों को वन विभाग की अभिरक्षा में रखने के बजाय न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की कार्रवाई की जा रही है।
सिंगपुर रेंज की यह कार्रवाई जहां अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ वन विभाग की सख्ती को दर्शाती है, वहीं वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पर लगे आरोपों ने जंगल बचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।



