प्रधानमंत्री ने किया लाल किले से विकसित भारत का रोडमैप समय हमारा,अवसर हमारा, संकल्प हमारा:
नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने विकसित भारत का विजन रखते हुए युवाओं, महिलाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, जनगणना और नक्सलवाद जैसे अहम मुद्दों पर स्पष्ट संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने देशवासियों से सपनों को संकल्प और संकल्प को सफलता में बदलने का आह्वान किया।
पंच प्राण से विकसित भारत तक
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने संकल्पों को याद करते हुए कहा कि लाल किले से पहले उन्होंने ‘पंच प्राण’ की बात की थी, जिसने देश के सामूहिक संकल्प को नई दिशा दी। उन्होंने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों के भारत के सपने को याद करते हुए उसे साकार करने की जिम्मेदारी देशवासियों के कंधों पर रखी।
उन्होंने कहा— “समय हमारा है, अवसर हमारा है और संकल्प हमारा है।” प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपने सपनों को संकल्प, संकल्प को सामर्थ्य और सामर्थ्य को सफलता में बदलने का आह्वान किया।
जनगणना में युवाओं से भागीदारी की अपील
प्रधानमंत्री ने युवाओं से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की योजनाओं को बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए सटीक आंकड़े बेहद जरूरी हैं। सही जानकारी उपलब्ध कराने और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से जनगणना को अधिक प्रभावी बनाने में नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व देने का आह्वान
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में महिला शक्ति को मजबूत करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया है। अब राजनीतिक दलों को आगे बढ़कर महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम करना चाहिए।
सुरक्षा में नागरिकों की भी होगी भागीदारी
राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने एक बड़े सिविल डिफेंस नेटवर्क की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि नागरिकों को भी इसमें सहभागी बनाया जाएगा। इस नेटवर्क में युवाओं की बड़ी भूमिका होगी और यह आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
नक्सलवाद पर दो टूक संदेश
नक्सलवाद और माओवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि चार दशकों तक हिंसा ने देश के कई हिस्सों को प्रभावित किया। वर्ष 2014 के बाद सरकार ने इसे समाप्त करने का संकल्प लिया और अब देश इस दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और धरती रक्तरंजित होती थी, वहां आज विश्वास, विकास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।
प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि “हथियार वाले नक्सली तो मारे गए, लेकिन दिमाग वाले नक्सली अभी देश में हैं।” उन्होंने ऐसे तत्वों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
एक दीप से जलें दीप हजारों
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विकसित भारत के लक्ष्य के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर कदम विकास की दिशा में बढ़ना चाहिए और देशवासियों को कदम से कदम तथा मन से मन मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
संदेश साफ है, देश के सामने समय भी है, अवसर भी है और संकल्प भी। अब इन्हें सामूहिक शक्ति में बदलकर विकसित भारत के सपने को साकार करना है।

