शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शासन से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की उठाई मांग
उत्तम साहू
रायपुर/नगरी। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षकों एवं शिक्षकों की पदोन्नति में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शासन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है। फेडरेशन ने टीईटी की अनिवार्यता तत्काल समाप्त कर वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को वरिष्ठता के आधार पर शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य पात्रता के रूप में स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में प्रचलित नियमों से अलग अतिरिक्त शर्त जोड़कर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति रोकना उचित नहीं है।
फेडरेशन ने शासन के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया जा रहा है, तो इस अवधि में टीईटी के नाम पर पात्र एवं वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति रोकने का औचित्य क्या है। फेडरेशन का कहना है कि टीईटी की प्रक्रिया अपनी जगह जारी रह सकती है, लेकिन इससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए।
वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग
फेडरेशन ने मांग की है कि वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया वरिष्ठता सूची के आधार पर तत्काल शुरू कर पूरी की जाए। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण सहित सभी वैधानिक नियमों एवं प्रावधानों का पालन किया जाए।
फेडरेशन ने यह भी मांग रखी है कि यदि टीईटी को आवश्यक माना जाता है तो वर्ष 2028 तक शिक्षकों को पर्याप्त अवसर दिया जाए, लेकिन इस अवधि में किसी शिक्षक की पदोन्नति न रोकी जाए। सभी पात्र शिक्षकों को अवसर देने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से विभागीय टीईटी आयोजित कराने की मांग भी की गई है।
“वरिष्ठता का सम्मान हो, सेवा का अपमान नहीं”
फेडरेशन ने कहा कि अनेक शिक्षक वर्षों से विभाग में सेवाएं देते हुए अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में केवल टीईटी की शर्त के कारण उनकी पदोन्नति रोकना उनके अनुभव, वरिष्ठता और सेवा अधिकारों के साथ अन्याय है।
फेडरेशन ने कहा कि एक ओर वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जा रहा है और दूसरी ओर इसी अवधि में पदोन्नति रोकने का प्रयास किया जा रहा है। यह दोहरी व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। शासन को शिक्षकों के हित में स्पष्ट और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि यदि वर्तमान में पदोन्नति के लिए रिक्त पद उपलब्ध हैं तो उन पर नियमानुसार वरिष्ठता के आधार पर तत्काल पदोन्नति की जानी चाहिए। पदोन्नति में अनावश्यक विलंब से विभागीय व्यवस्था प्रभावित होने के साथ भविष्य में न्यायालयीन विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर प्रदेश के हजारों शिक्षकों के हित में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की है।
फेडरेशन की ओर से यह विज्ञप्ति ब्लॉक संयोजक डोमार सिंह ध्रुव, छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन, ब्लॉक शाखा नगरी, जिला धमतरी द्वारा जारी की गई।

