जन्मदिन को बनाया सेवा और सम्मान का अवसर, वृद्धजनों के बीच मनोज पटेल ने साझा की खुशियां

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जन्मदिन को बनाया सेवा और सम्मान का अवसर, वृद्धजनों के बीच मनोज पटेल ने साझा की खुशियां

‘हमर ठिहा (सियान गुड़ी)’ में मनाया 40वां जन्मदिन, वृद्धजनों को वस्त्र व मिठाई भेंट कर लिया आशीर्वाद



उत्तम साहू,नगरी। जन्मदिन आमतौर पर परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाने का अवसर होता है, लेकिन नगरी के मनोज पटेल ने अपने 40वें जन्मदिन को कुछ अलग अंदाज में मनाकर समाज के वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और संवेदना की मिसाल पेश की। इंदु फ्यूचर विंग्स फाउंडेशन द्वारा नगरी में संचालित ‘हमर ठिहा (सियान गुड़ी)’ में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में उन्होंने वृद्धजनों के साथ समय बिताया और उनके बीच जन्मदिन की खुशियां साझा कीं।

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मनोज पटेल ने वृद्धजनों के साथ केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया। इसके बाद उन्होंने उपस्थित बुजुर्गों को वस्त्र एवं मिठाई भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। जन्मदिन के मौके पर सेवा और सम्मान की इस पहल ने कार्यक्रम को आत्मीय और यादगार बना दिया।


मनोज पटेल ने कहा कि जीवन में जन्मदिन जैसे विशेष अवसर केवल स्वयं की खुशी तक सीमित नहीं रहने चाहिए। समाज के वरिष्ठजनों के साथ कुछ समय बिताकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, संघर्ष और जीवन से मिली सीख आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करती है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह वरिष्ठजनों का सम्मान करे और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा रहे।

कार्यक्रम के दौरान वृद्धजनों ने भी मनोज पटेल को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बुजुर्गों के साथ हंसी-मजाक, बातचीत और आत्मीय मुलाकात से आयोजन स्थल पर पारिवारिक माहौल बन गया।



स्वतंत्रता दिवस और जन्मदिन के इस संयुक्त आयोजन ने ‘हमर ठिहा (सियान गुड़ी)’ में सेवा, सम्मान और सामाजिक सरोकार का संदेश दिया। आयोजन ने यह भी संदेश दिया कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और किसी जरूरतमंद या बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान लाना ही किसी भी उत्सव की सबसे बड़ी सार्थकता है।

मनोज पटेल की यह पहल जन्मदिन मनाने के पारंपरिक तौर-तरीकों से अलग रही और समाज में ‘उत्सव के साथ सेवा’ की भावना को मजबूत करने वाली पहल के रूप में सामने आई।

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