धमतरी जिले का एकमात्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बदहाली का शिकार, वर्षों से खाली पड़े पदों ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल
प्राचार्य से लेकर व्याख्याता तक के पद रिक्त, आधे से भी कम स्टाफ के भरोसे चल रहा डीएलएड प्रशिक्षण संस्थान; शासन की उदासीनता से प्रभावित हो रही शिक्षकों की गुणवत्ता
उत्तम साहू
नगरी (धमतरी)। आदिवासी विकासखंड नगरी स्थित धमतरी जिले का एकमात्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में (डी.एल,एड, द्विवर्षीय पाठयक्रम) का पढ़ाई किया जाता है, जो आज गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। भविष्य के शिक्षकों को तैयार करने वाले इस महत्वपूर्ण संस्थान में वर्षों से शिक्षकों और कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थिति ऐसी है कि जिस संस्थान से गुणवत्तापूर्ण शिक्षक तैयार होने चाहिए, वहीं आज मूलभूत मानव संसाधनों का अभाव बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार संस्थान में कुल 41 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 8 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति शिक्षण स्टाफ की है। 12 व्याख्याताओं के स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल 5 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि 5 सहायक प्राध्यापकों के स्थान पर मात्र 1 ही उपलब्ध है। इसी तरह लेखा एवं प्रशासनिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित है। 9 लेखापालों के स्थान पर केवल 2 कर्मचारी कार्यरत हैं और 7 पद खाली हैं। इसके अलावा प्राचार्य और उप प्राचार्य जैसे सबसे महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से रिक्त हैं।
यह संस्थान धमतरी जिले का एकमात्र प्रशिक्षण केंद्र है, जहां डीएलएड सहित शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। ऐसे संस्थान में वर्षों से पद खाली रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सवाल यह है कि जब प्रशिक्षु शिक्षकों को ही पर्याप्त मार्गदर्शन और विषय विशेषज्ञ नहीं मिलेंगे, तो भविष्य में स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
बताया जा रहा है कि इस गंभीर समस्या की शिकायत कई बार उच्च स्तर पर की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर वर्ष नई शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होती है, लेकिन रिक्त पदों को भरने के बजाय केवल आश्वासन ही मिलते हैं। इसका सीधा असर प्रशिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा सुधार को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले ऐसे प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना होगा। केवल नई योजनाओं और घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर रिक्त पदों की भर्ती और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में ही प्राचार्य, उप प्राचार्य और अधिकांश शिक्षकों के पद खाली हैं, तो आखिर प्रदेश में शिक्षा सुधार के दावे कितने वास्तविक हैं? शासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि भविष्य के शिक्षकों का प्रशिक्षण प्रभावित न हो और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।

