ग्राम सभाओं के हाथों में होगी जंगलों के प्रबंधन की कमान
10 ग्राम सभाओं का चयन, प्रत्येक CFR समिति को मिलेंगे 15 लाख रुपये
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा—वन संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन को दें प्राथमिकता
उत्तम साहू
धमतरी, 17 अगस्त 2026। सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए धमतरी जिले में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपते हुए वन संरक्षण को ग्रामीण आजीविका और स्थानीय विकास से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
इसी कड़ी में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सामुदायिक वन संसाधन (CFR) क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण, CFR प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने तथा वन संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा हुई।
10 ग्राम सभाओं का चयन, प्रत्येक समिति को 15 लाख
बैठक में CFR अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले की 10 ग्राम सभाओं का चयन किया गया। चयनित ग्राम सभाओं के अंतर्गत गठित प्रत्येक सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFRMC) को वन प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिए 15 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जाएगी।
समितियों को स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध वन संसाधनों, जैव विविधता और ग्रामीण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत सामुदायिक वन प्रबंधन योजना तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी।
दो संस्थाओं को तकनीकी एवं सामाजिक सहयोग की जिम्मेदारी
ग्राम सभाओं और CFRMC को जमीनी स्तर पर तकनीकी एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए बैठक में दो अशासकीय संस्थाओं (NGOs) को कार्य के लिए अनुमोदित किया गया। ये संस्थाएं ग्राम सभाओं के साथ समन्वय कर वन प्रबंधन योजना तैयार करने, स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने और स्वीकृत गतिविधियों के प्रभावी संचालन में सहयोग करेंगी।
वन संरक्षण के साथ आजीविका पर विशेष जोर
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार केवल वन संरक्षण तक सीमित व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग में सहभागी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं को उनके अधिकारों और दायित्वों की स्पष्ट जानकारी दी जाए तथा CFRMC को प्रभावी और सक्रिय बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रबंधन योजनाएं केवल कागजी दस्तावेज न बनें, बल्कि स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध वन संसाधनों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित व्यावहारिक कार्ययोजना हों। इसमें वन संरक्षण के साथ वनोपज का बेहतर प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों को भी शामिल किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि वन बचेंगे तो गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। लघु वनोपज, औषधीय पौधों और अन्य वन आधारित गतिविधियों के टिकाऊ उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
जैव विविधता संरक्षण और सतत उपयोग बनेगा आधार
बैठक में बताया गया कि चयनित ग्राम सभाओं की प्रबंधन योजनाओं में वन संरक्षण, पुनर्जीवन, जैव विविधता संवर्धन, जल एवं मृदा संरक्षण, वन संसाधनों का सतत उपयोग तथा स्थानीय पारिस्थितिकी के संरक्षण को प्रमुखता दी जाएगी। इसके अलावा वनोपज के वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं को भी योजनाओं में शामिल किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को वन संसाधनों से बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
ग्राम सभा के अधीन काम करेगी CFRMC
सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFRMC) ग्राम सभा के अधीन कार्य करने वाली स्थानीय समिति है। वन अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त सामुदायिक वन क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता की रक्षा तथा वनोपज के न्यायसंगत एवं सतत उपयोग में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने तथा प्रत्येक चरण में ग्राम सभा की सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन तभी सफल होगा, जब वन संरक्षण, ग्राम सभा की भागीदारी और ग्रामीणों की आजीविका—इन तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।
बैठक में जिला पंचायत एवं समिति के सदस्य श्री टीकाराम कंवर, श्री अजय ध्रुव, श्रीमती गरिमा नेताम, डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ श्री वरुण जैन, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्री विमल साहू सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

