जल-जंगल-जमीन पर फिर गरजेगा आदिवासी समाज, 24 सितंबर को खल्लारी में 128 गांवों की महाबैठक
दो माह पहले कलेक्ट्रेट घेराव के बाद अब खल्लारी में शक्ति प्रदर्शन
धमतरी/गरियाबंद/नगरी। सितानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन के साथ मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज का आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है। जल-जंगल संघर्ष समिति के आह्वान पर 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजे ग्राम खल्लारी के बाजार चौक में 128 गांवों की महा-बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से ग्रामीणों के शामिल होने की बात कही गई है।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, करीब दो माह पहले सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और वन अधिकार पट्टों सहित विभिन्न मांगों को लेकर लगभग 8 से 10 हजार आदिवासी ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया था। समिति का कहना है कि बड़े आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल
समिति के अनुसार, क्षेत्र प्रशासनिक दृष्टि से धमतरी जिले में आता है, जबकि वन विभाग से संबंधित व्यवस्था गरियाबंद वन मंडल के अंतर्गत है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दोहरी प्रशासनिक व्यवस्था के कारण क्षेत्र के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय का अभाव दिखाई देता है। उनका कहना है कि सड़क, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई मामले लंबे समय से लंबित हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से जुड़े अधिकारियों पर विस्थापन के लिए दबाव बनाने, पुश्तैनी जमीन को अवैध बताकर कार्रवाई करने तथा कथित तौर पर गोली मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और महा-बैठक में इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने की तैयारी है।
ग्रामसभा प्रस्ताव से लेकर एफआईआर की रणनीति तक
महा-बैठक में चार प्रमुख मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। 128 गांवों और उनके पारा-टोला की ग्रामसभाओं में पारित प्रस्तावों का संकलन कर उन्हें संघर्ष समिति के माध्यम से आगे की कानूनी प्रक्रिया का आधार बनाया जाएगा। इसके अलावा बैठक में उपस्थिति पंजी तैयार कर संगठन की भागीदारी दर्ज की जाएगी।
वहीं, वन अधिकारी के खिलाफ लगाए गए कथित उत्पीड़न, अधिकार हनन, विस्थापन के दबाव और धमकी के आरोपों को लेकर थाना खल्लारी में एफआईआर दर्ज कराने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। आंदोलन को आगे जारी रखने के लिए प्रत्येक घर से 50 रुपये सहयोग राशि जुटाने का निर्णय भी बैठक के एजेंडे में शामिल है।
संघर्ष समिति से जुड़े मनोज साक्षी, श्रीधन सोम, संजय नेताम, रेवा, देवदास, नरेश मांझी, हिम्मत सिंह नेताम, चंद्र कुमार अग्रवानी, माखन सलाम, रविशंकर नेताम और पूरन मेश्राम ने संयुक्त रूप से ग्रामीणों से महा-बैठक में शामिल होने की अपील की है।

