रूद्री थाना-कंट्रोल रूम पहुंचे स्कूली बच्चे, करीब से जानी पुलिसिंग की बारीकियां
एफआईआर से सीसीटीएनएस तक समझी प्रक्रिया, डायल-112, वायरलेस और साइबर सुरक्षा की भी मिली जानकारी
उत्तम साहू
धमतरी/ 14 सितंबर 2026। पुलिस को सिर्फ वर्दी और कार्रवाई तक सीमित समझने वाले स्कूली बच्चों को सोमवार को पुलिसिंग की पूरी व्यवस्था करीब से देखने और समझने का मौका मिला। पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय के निर्देश पर रूद्री पुलिस ने सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं के लिए थाना एवं पुलिस कंट्रोल रूम की शैक्षणिक यात्रा आयोजित की। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत आयोजित इस पहल में विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून और आधुनिक तकनीक से रूबरू कराया गया।
थाना भ्रमण के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को आरक्षक से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक पुलिस विभाग की विभिन्न रैंक और उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी दी। बच्चों को बताया गया कि अपराध की सूचना मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करने से लेकर विवेचना और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। थाना परिसर के मालखाने में जब्त सामग्री और संपत्ति के सुरक्षित रख-रखाव तथा रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया भी समझाई गई।
डिजिटल पुलिसिंग से लेकर महिला-बाल सुरक्षा तक जानकारी
विद्यार्थियों को सीसीटीएनएस, वीसीएनबी सहित डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया गया कि अपराध एवं अपराधियों से जुड़े रिकॉर्ड को किस तरह तकनीक के माध्यम से संधारित किया जाता है। पुलिस वेरिफिकेशन, महिला एवं बाल डेस्क की भूमिका तथा पुलिस पेट्रोलिंग के जरिए अपराधों की रोकथाम और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी की जानकारी भी दी गई।
इसके बाद विद्यार्थियों ने पुलिस कंट्रोल रूम का भ्रमण किया। यहां उन्हें डायल-112 की कार्यप्रणाली, वायरलेस सिस्टम और पुलिस संचार व्यवस्था के बारे में बताया गया। आपात स्थिति में सूचना मिलने से लेकर घटनास्थल तक पुलिस सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया ने बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाई।
साइबर ठगी से बचाव के बताए तरीके
कार्यक्रम में नवीन आपराधिक कानूनों के साथ साइबर अपराध से बचाव पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन और पासवर्ड साझा नहीं करने की समझाइश दी गई। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करने की जानकारी भी दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए और उन्हें नशे व असामाजिक गतिविधियों से दूर रहने, यातायात नियमों का पालन करने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने के लिए प्रेरित किया। पुलिस का मानना है कि ऐसी पहल से बच्चों में कानून के प्रति समझ बढ़ने के साथ पुलिस के प्रति विश्वास और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।

