योजनाओं के अभिसरण से गांवों में विकास को मिलेगी नई गति
रोजगार, आजीविका, पर्यटन, वन संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छता कार्यों की व्यापक समीक्षा
उत्तम साहू
धमतरी, 01 सितंबर 2026। जिले में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रामीण विकास को नई गति देने और विभिन्न शासकीय योजनाओं के प्रभावी अभिसरण के उद्देश्य से जिला पंचायत सभाकक्ष में विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन संरक्षण, पर्यटन विकास, बाड़ी विकास, औषधीय पौधरोपण, जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना एवं स्वच्छता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा की उपस्थिति में आयोजित बैठक में वनमंडलाधिकारी धमतरी श्री कृष्णा जाधव तथा उप निदेशक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद श्री वरूण जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि एवं उद्यानिकी विकास, वन संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं तथा ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में ‘एक क्षेत्र–अनेक योजनाओं का समन्वित लाभ’ की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। सीईओ जिला पंचायत श्री नाहटा ने कहा कि विभिन्न विभागों की योजनाओं को आपस में जोड़कर कार्य करने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा सकेगा। उन्होंने कार्यों के चयन में स्थानीय आवश्यकता, उपयोगिता, गुणवत्ता और दीर्घकालिक लाभ को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
वन क्षेत्रों में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
वन क्षेत्रों एवं उनसे लगे ग्रामीण इलाकों में बायोफेंसिंग और तार फेंसिंग जैसे अनुमेय कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य वन क्षेत्रों, वृक्षारोपण स्थलों और निर्मित परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से जुड़े क्षेत्रों में ग्रामीणों के आवागमन और आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। दौड़-पंडरीपानी मार्ग सहित विभिन्न स्थानों पर पुलिया निर्माण के प्रस्तावों को विभिन्न योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से पूरा करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में सड़क, पुलिया और संपर्क सुविधाओं के विकास से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार एवं अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
पर्यटन विकास से खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
बैठक में जिले के पर्यटन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष चर्चा की गई। पर्यटन स्थलों पर सड़क, शौचालय, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता एवं सुरक्षित आवागमन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इको पार्क सहित अन्य पर्यटन क्षेत्रों के विकास एवं रखरखाव में ग्राम पंचायतों की भूमिका सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत मेचका, खल्लारी तथा धमतरी विकासखंड के हरफर, सटियारा और कोड़ेगांव (रै) सहित विभिन्न क्षेत्रों में वन एवं राजस्व क्षेत्र के अनुसार संबंधित एजेंसियों के माध्यम से जनसुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
सीईओ श्री नाहटा ने कहा कि पर्यटन अधोसंरचना का विकास केवल पर्यटकों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
औषधीय पौधों और वृक्षारोपण से बढ़ेगी आय
पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आय बढ़ाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों के रोपण एवं वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। बूटीगढ़ क्षेत्र में औषधीय प्लांटेशन के लिए आवश्यक कार्रवाई तथा सिंदूरी और शतावर जैसे औषधीय पौधों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
ग्राम पंचायत सारंगपुरी, डोंढ़की, खरेंगा, लोहरसी और देवपुर सहित अन्य क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वृक्षारोपण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
बाड़ी, पोषण वाटिका और सेरीकल्चर को मिलेगा बढ़ावा
ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने के लिए बाड़ी विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। कुकरेल क्लस्टर की ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से बाड़ी विकास कार्य कराने की योजना पर चर्चा हुई।
पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 10-10 पंचायतों के समूह में मॉडल आधारित पोषण वाटिका विकसित करने के निर्देश दिए गए। वहीं सेरीकल्चर गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों को कृषि के अतिरिक्त स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसके लिए उपयुक्त क्षेत्रों के चयन, पौधारोपण, प्रशिक्षण और आवश्यक संरचनाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
हर ब्लॉक में 20-20 धरसा सड़कों की बनेगी कार्ययोजना
बैठक में कृषि आधारित परिसंपत्तियों, जल संरक्षण और किसानों के लिए उपयोगी संरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। बड़ी ग्राम पंचायतों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक में 20-20 धरसा सड़कों के निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर स्वीकृति के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए।
युक्तधारा के माध्यम से उपलब्ध कार्यों एवं परिसंपत्तियों की समन्वित योजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। मुक्तिधाम निर्माण के स्वीकृत कार्यों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए गए।
नरहरा क्षेत्र में सामुदायिक उपयोग की संरचनाओं, सड़क, शौचालय एवं सामुदायिक नाडेप निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता से स्वीकृत कर समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराने पर जोर दिया गया।
148 ग्राम पंचायतों में बनेंगे 1151 नाडेप
ग्रामीण स्वच्छता एवं ठोस तथा जैविक अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण कार्ययोजना तैयार की गई है। एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के अंतर्गत जिले की 148 ग्राम पंचायतों में 1151 नाडेप निर्माण कार्यों को स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) प्लस एवं विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत किए जाने की योजना बनाई गई है।
नाडेप इकाइयों के निर्माण से जैविक एवं घरेलू कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। जैविक कचरे से खाद तैयार कर उसका उपयोग कृषि कार्यों में किया जा सकेगा। इससे कचरे के उचित निस्तारण के साथ किसानों को जैविक खाद की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह पहल गांवों में कचरे के पृथक्करण, पुनः उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन की संस्कृति विकसित करने में सहायक होगी। खुले में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति में कमी आएगी और ग्राम पंचायतों की स्वच्छता व्यवस्था अधिक व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनेगी।
समय पर भुगतान और गुणवत्तापूर्ण कार्य के निर्देश
सीईओ जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने स्वीकृत कार्यों में आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मटेरियल भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होने देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गति बनाए रखने के लिए भुगतान प्रक्रिया समयबद्ध हो तथा सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक कार्य का चयन स्थानीय जरूरतों और ग्रामीणों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ को ध्यान में रखकर किया जाए। उन्होंने कहा कि अभिसरण का वास्तविक उद्देश्य केवल अलग-अलग योजनाओं को जोड़ना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के समन्वित उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय, अधोसंरचना और जीवन-स्तर में स्थायी सुधार लाना है।
योजनाएं जुड़ेंगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और गांवों में विकास की नई तस्वीर खिलेगी।

