स्थानीय प्रशिक्षित कैडर से विद्यार्थियों को मिलेगा अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग
जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा ने सामुदायिक शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम की समीक्षा की, वास्तविक जरूरत वाले स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता
उत्तम साहू
धमतरी, 18 सितंबर 2026। जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय प्रशिक्षित मानव संसाधन को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की पहल की जा रही है। प्रस्तावित ‘सामुदायिक शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम’ को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने जिला पंचायत सभाकक्ष में संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की।
सीईओ नाहटा ने कहा कि कार्यक्रम में विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को प्राथमिक आधार बनाया जाए। उन्होंने विद्यालयवार शिक्षक उपलब्धता, रिक्त पद, विद्यार्थी संख्या तथा कक्षावार एवं विषयवार शिक्षकीय आवश्यकता का तथ्यात्मक आकलन कर प्राथमिकता वाले विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी नियमित शिक्षकों का विकल्प नहीं होंगे, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने में अतिरिक्त सहयोग प्रदान करेंगे। प्रथम प्राथमिकता ऐसे विद्यालयों को देने का प्रस्ताव है, जहां स्वीकृत पदों के विरुद्ध शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद शिक्षकीय मानव संसाधन की कमी, विशेष विषयों में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता तथा दूरस्थ एवं कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पढ़ने-लिखने और गणितीय दक्षता पर जोर
प्रस्तावित सहयोगी विद्यार्थियों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने, कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण, पुस्तकालय एवं पठन गतिविधियों, स्थानीय भाषा आधारित शिक्षण तथा खेल-कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सहयोग करेंगे। अभिभावकों और समुदाय के साथ शैक्षणिक संवाद को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। कक्षा 1 से 8 तक विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार पर विशेष फोकस रहेगा।
सीईओ नाहटा ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्थानीय स्तर पर गठित समिति के माध्यम से चयन का प्रस्ताव है, जिसमें शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायत, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति तथा बिहान के प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्राथमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम 12वीं तथा माध्यमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम स्नातक योग्यता प्रस्तावित है। संबंधित विषय में योग्यता, बच्चों के साथ कार्य का अनुभव, स्थानीय भाषा-बोली का ज्ञान और प्रशिक्षण जैसी योग्यताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
गुणवत्ता और बाल सुरक्षा की होगी निगरानी
नाहटा ने बाल सुरक्षा और शैक्षणिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। चयनित सहयोगियों को बाल अधिकार, बाल संरक्षण, विद्यालय सुरक्षा तथा शारीरिक एवं मानसिक दंड निषेध से संबंधित आवश्यक अभिमुखीकरण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत विद्यालय स्तर पर मासिक और संकुल स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी। विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ने-लिखने की क्षमता, गणितीय दक्षता और विषयगत अधिगम में सुधार का आकलन किया जाएगा। प्रथम चरण में चयनित विद्यालयों में इसे प्रायोगिक परियोजना के रूप में लागू कर परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी ने बताया कि पहल का उद्देश्य स्थानीय प्रशिक्षित मानव संसाधन को विद्यालयों से जोड़कर विद्यार्थियों को आवश्यकता-आधारित अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सामुदायिक शैक्षणिक सहयोग की यह व्यवस्था नियमित शिक्षक भर्ती अथवा पदस्थापना का विकल्प नहीं होगी। नियमित शिक्षक पदों पर भर्ती एवं पदस्थापना शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार ही होगी तथा सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी के रूप में कार्य करने से नियमित शासकीय सेवा अथवा नियमितीकरण का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

