नगरी में छोटे उद्यमियों को सिखाए ब्रांड निर्माण के गुर
RAMP कार्यक्रम के तहत ‘Building Your Brand’ प्रशिक्षण, करीब 50 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
नगरी। छोटे उद्यमियों, ग्रामीण कारीगरों और घरेलू स्तर पर व्यवसाय करने वाले लोगों को अपने हुनर की पहचान बनाने और उसे बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से जनपद पंचायत नगरी में ‘Building Your Brand’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। यह आयोजन AFC इंडिया लिमिटेड द्वारा RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण में करीब 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन AFC टीम की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एवं प्रशिक्षक सुश्री दिव्या मुदलियार तथा श्री विनीत कुमार झा ने किया। इस अवसर पर जनपद पंचायत नगरी के BPM टिकेश्वर ध्रुव भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
ब्रांड सिर्फ नाम नहीं, भरोसे की पहचान
प्रशिक्षण की शुरुआत इस सवाल से हुई कि ‘ब्रांड क्या होता है?’ प्रशिक्षकों ने सरल उदाहरणों के माध्यम से बताया कि ब्रांड केवल किसी उत्पाद का नाम या लोगो नहीं होता, बल्कि ग्राहक के मन में उत्पाद और उसके निर्माता के प्रति बनने वाला विश्वास और पहचान ही वास्तविक ब्रांड है।
इसे घरेलू स्तर पर आम का अचार बनाने वाली महिला उद्यमी के उदाहरण से समझाया गया। जब ग्राहक किसी विशेष अचार को उसकी गुणवत्ता और स्वाद के कारण पहचानने लगते हैं और कहते हैं कि ‘अचार तो उसी दीदी का सबसे अच्छा है’, तो यही भरोसा उस उद्यमी की ब्रांड पहचान बन जाता है।
ब्रांड बनाने के बताए चार सूत्र
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को अपने व्यवसाय को पहचान दिलाने के लिए चार प्रमुख बातों पर विशेष जोर दिया गया। इनमें सरल और याद रहने वाला नाम चुनना, उत्पाद की गुणवत्ता हमेशा बनाए रखना, एक जैसी और साफ-सुथरी पैकेजिंग रखना तथा ग्राहकों का विश्वास कायम करना शामिल रहा।
प्रशिक्षकों ने कहा कि जो वादा ग्राहक से किया जाए, उसे पूरा करना और उत्पाद की गुणवत्ता में ईमानदारी बरतना लंबे समय में व्यवसाय की सबसे मजबूत पहचान बनती है।
गांव के हुनर को बाजार तक पहुंचाने पर जोर
सत्र में बताया गया कि किसी उत्पाद की ब्रांड पहचान बनने से उसका बाजार गांव की सीमाओं से आगे बढ़कर शहरों तक पहुंच सकता है। ग्राहक का भरोसा कायम होने पर पुराने ग्राहक दोबारा जुड़ते हैं और नए ग्राहक भी आकर्षित होते हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत और आय के नए अवसर मिल सकते हैं।
प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने पारंपरिक हुनर और उत्पाद को केवल व्यवसाय तक सीमित न रखें, बल्कि उसकी एक अलग और भरोसेमंद पहचान यानी ब्रांड बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
कार्यक्रम के माध्यम से AFC इंडिया लिमिटेड, CSIDC और RAMP की ओर से स्थानीय उद्यमियों को क्षमता निर्माण, बाजार पहुंच और व्यवसाय को मजबूत बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया।



