कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने दलहन-तिलहन का रकबा दोगुना करने के दिए निर्देश

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 कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने दलहन-तिलहन का रकबा दोगुना करने के दिए निर्देश

जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की पहल, 10 हजार हेक्टेयर में AWD तकनीक के विस्तार पर जोर



उत्तम साहू,धमतरी, 16 अक्टूबर। जिले में जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के साथ कृषि क्षेत्र में विविधीकरण की दिशा में पहल की जा रही है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक क्षेत्रों में वैकल्पिक जल प्रबंधन पद्धति अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) तकनीक का विस्तार करते हुए 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा वर्तमान क्षेत्रफल की तुलना में दोगुना करने पर जोर दिया गया है। वहीं, ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर की अध्यक्षता में कृषि विभाग और परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में AWD तकनीक के विस्तार, फसल विविधीकरण, किसानों को बाजार सुविधा उपलब्ध कराने तथा जोरातराई नवीन में चल रहे कार्यों की समीक्षा की गई।


      जोरातराई नवीन बनेगा कार्बन न्यूट्रल गांव



बैठक में बताया गया कि जोरातराई नवीन में AWD तकनीक के अंतर्गत पात्र किसानों की लगभग 95 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग, प्रशिक्षण और क्रियान्वयन संबंधी कार्य पूरे हो चुके हैं। इस प्रगति के आधार पर गांव को कार्बन न्यूट्रल मॉडल के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है।

कलेक्टर मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों को शेष पात्र किसानों को जल्द से जल्द तकनीक से जोड़ने और गांव में संचालित गतिविधियों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। किसानों को AWD तकनीक के लाभ, इसके व्यावहारिक उपयोग और सिंचाई जल के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के संबंध में जागरूक करने के लिए मैदानी स्तर पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जाएं।


दलहन-तिलहन का रकबा दोगुना करने पर जोर

कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से ग्रामवार कार्ययोजना बनाकर किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को उनकी उपज की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसके लिए सहकारी समितियों और खरीदी से जुड़ी संस्थाओं की संख्या तथा कार्यक्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही खरीदी केंद्रों में आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के निर्देश दिए गए, ताकि दलहन एवं तिलहन उत्पादक किसानों को स्थानीय स्तर पर उपज बेचने की सुविधा मिल सके और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त हो।


जल संरक्षण के साथ पर्यावरण को मिलेगा लाभ

AWD तकनीक के तहत धान के खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय खेत की नमी और जलस्तर के अनुसार अंतराल पर सिंचाई की जाती है। इससे सिंचाई जल का अधिक कुशल उपयोग करने में मदद मिलती है। साथ ही धान की खेती से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने की भी संभावना रहती है।

इस पहल के माध्यम से जल संसाधनों का संरक्षण करने, कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है। परियोजना के निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्बन क्रेडिट के माध्यम से पात्र किसानों को संभावित अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिलाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

बैठक में उप संचालक कृषि मोनेश साहू, MANKHE Pvt. Ltd. के प्रतिनिधि सावन शर्मा, PRITHU के प्रतिनिधि अभय तोमर, संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और कृषि विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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