शीतला शक्ति पीठ सिहावा में महाष्टमी पर वैदिक मंत्रों से गूंजा मंदिर, हवन-पूर्णाहुति में उमड़ा आस्था का सैलाब
नवकन्या पूजन से महाआरती तक श्रद्धालुओं ने निभाई सहभागिता, आचार्य नारायण प्रसाद पाठक ने बताया नवरात्रि साधना का आध्यात्मिक महत्व
नगरी। शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर सिहावा स्थित प्रसिद्ध मां शीतला शक्ति पीठ में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार को मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। मां शीतला के दर्शन, विशेष पूजा-अर्चना और हवन में शामिल होने दूर-दराज से भी भक्त पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की गूंज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
महाष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार रविवार को नवकन्याओं एवं लगरूवा महाराज का विधि-विधान से पूजन किया गया। उनके चरण धोकर तिलक-वंदन किया गया तथा लाल चुनरी अर्पित कर खीर, पूड़ी, फल सहित विभिन्न प्रसादों का भोग लगाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
तेरह अध्यायों के बीज मंत्रों के साथ दी गई आहुतियां
महाष्टमी के विशेष हवन का शुभारंभ सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे आचार्य नारायण प्रसाद पाठक के मार्गदर्शन में हुआ। दुर्गा सप्तशती के सभी तेरह अध्यायों के बीज मंत्रों के साथ यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित की गईं। हवन में विभिन्न औषधीय सामग्रियों से तैयार हवन सामग्री एवं सांखला का उपयोग किया गया।
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि श्रद्धालुओं को भी हवन में प्रत्यक्ष सहभागिता का अवसर मिला। प्रथम से तेरहवें अध्याय तक भक्त बारी-बारी से यज्ञशाला में प्रवेश कर मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित करते रहे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। कई श्रद्धालुओं ने नौ दिनों तक किए गए जप-तप और साधना की पूर्णता हवन एवं पूर्णाहुति के साथ की।
महाआरती के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान
शाम को विधि-विधान के साथ हवन की पूर्णाहुति कराई गई। इसके पश्चात मां शीतला की भव्य महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने माता के दर्शन कर क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य, अच्छी वर्षा और समृद्धि की कामना की। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
नवरात्रि आत्मशुद्धि और साधना का महापर्व : आचार्य पाठक
आचार्य नारायण प्रसाद पाठक ने महाष्टमी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की जाती है। उनकी पूजा से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की जाती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ तक सीमित पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, जप, तप और साधना का अवसर है। श्रद्धा एवं संयम के साथ माता की आराधना करने से मन में व्याप्त नकारात्मक विचारों और विकारों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने तथा माता की भक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
समिति सदस्यों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
महाष्टमी के आयोजन को सफल बनाने में शीतला शक्ति पीठ के अध्यक्ष नरेंद्र नाग, उपाध्यक्ष बलदेव निषाद एवं रामलाल नेताम, संरक्षक नेम सिंह बिशेन एवं मंशा गौर, सचिव नारद निषाद, सहसचिव बुधेश्वर साहू एवं लालेस्वर साहू, कोषाध्यक्ष गेंदलाल यादव, सलाहकार गगन नाहटा एवं भरत निर्मलकर, ग्राम पटेल राजेश यदु, सांस्कृतिक प्रभारी तुकाराम साहू, सहप्रभारी महेंद्र कौशल, निर्माण समिति प्रभारी सचिन भंसाली सहित समिति के सदस्यों और ग्रामीणों का सक्रिय योगदान रहा।
मंदिर के पुजारी ज्ञान सागर पटेल एवं परमेश्वर नेताम सहित अन्य सेवाभावी सदस्यों ने पूजा-अर्चना और व्यवस्थाओं में सहयोग किया। महाष्टमी के आयोजन ने एक बार फिर सिहावा क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकजुटता की झलक प्रस्तुत की।


