मुरिया दरबार का नाम बदलने की साजिश बर्दाश्त नहीं होगी: मनोज साक्षी
150 साल पुरानी आदिवासी परंपरा मिटाने का प्रयास, नाम बहाल नहीं होने पर धमतरी से लेकर बस्तर तक आंदोलन की चेतावनी
उत्तम साहू,धमतरी /नगरी :-बस्तर दशहरे के समापन पर होने वाले ऐतिहासिक "मुरिया दरबार" का नाम बदलकर "आम दरबार" करने की साजिश के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मनोज साक्षी ने कड़ा विरोध जताया है।
जिला अध्यक्ष मनोज साक्षी ने कहा कि मुरिया दरबार बस्तर की आत्मा है, यह लगभग 150 साल पुरानी परंपरा है। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सामूहिक चेतना, मांझी-चालकी की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। सिरहासार में वर्षों से आदिवासी प्रतिनिधि अपनी समस्याएं, जनमांगें और सामाजिक मुद्दे इसी दरबार में रखते आए हैं।
मनोज साक्षी ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार आदिवासी पहचान से जुड़े नामों और परंपराओं को मिटाने का काम कर रही है। पहले आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किया और अब बस्तर के ऐतिहासिक मुरिया दरबार का नाम बदलकर आम दरबार किया जा रहा है। यह आदिवासी संस्कृति पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी जी ने जो मुद्दा उठाया है, वह पूरे आदिवासी समाज की भावना है। हम उनके बयान का पूर्ण समर्थन करते हैं।
मनोज साक्षी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए और समस्त शासकीय दस्तावेजों में इसे पूर्ववत "मुरिया दरबार" के नाम से ही मान्यता दी जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नाम बहाल नहीं किया गया तो धमतरी सहित पूरे प्रदेश में आदिवासी कांग्रेस द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।
"मुरिया दरबार बस्तर की आत्मा है। इसका नाम बदलना हमारी संस्कृति और अस्मिता पर सीधा हमला है। बस्तर की ऐतिहासिक पहचान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।"

