विक्टिम आईडी में देरी बनी बाधा, पीएम राहत योजना के कैशलेस इलाज में तेजी लाने निजी अस्पतालों का निरीक्षण
दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का निःशुल्क आपातकालीन उपचार, अस्पतालों को थाना प्रभारियों से तत्काल समन्वय के निर्देश
उत्तम साहूधमतरी, 6 अक्टूबर 2026। सड़क दुर्घटनाओं में घायल पीड़ितों को ‘पीएम राहत योजना’ का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। जिला नोडल अधिकारी (आयुष्मान भारत योजना), बायोमेडिकल इंजीनियर एवं सहयोगी दल ने लुंकड नर्सिंग होम, धमतरी क्रिश्चियन हॉस्पिटल, श्रीराम हॉस्पिटल और ओजस्वी नर्सिंग होम पहुंचकर योजना के क्रियान्वयन की स्थिति और अस्पतालों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि विक्टिम आईडी जारी होने में देरी के कारण कई मामलों में कैशलेस उपचार शुरू करने में परेशानी आती है। नियमानुसार संबंधित थाना प्रभारी कार्यालय से विक्टिम आईडी 24 घंटे के भीतर जारी की जानी है। इस संबंध में निरीक्षण दल ने अस्पताल संचालकों को संबंधित थाना प्रभारियों से तत्काल और निरंतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विक्टिम आईडी समय पर जारी होने से दुर्घटना पीड़ितों को आपातकालीन स्थिति में आवश्यक उपचार प्राप्त करने में प्रक्रियागत देरी कम होगी। जिले के सभी निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम संचालकों को योजना के पात्र हितग्राहियों को प्राथमिकता के आधार पर त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस आपातकालीन उपचार दिया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर पीड़ित का राज्य के किसी भी अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रक्रियागत देरी के कारण किसी पात्र दुर्घटना पीड़ित के उपचार में व्यवधान नहीं आना चाहिए। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन और पुलिस विभाग के बीच त्वरित समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है।



