साइबर ठगी से बचाव के लिए पैरालीगल वालेंटियर्स को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

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साइबर ठगी से बचाव के लिए पैरालीगल वालेंटियर्स को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी और ऑनलाइन निवेश फ्रॉड के प्रति किया जागरूक, गांव-गांव तक पहुंचाएंगे साइबर सुरक्षा का संदेश


उत्तम साहू,धमतरी, 15 अक्टूबर। जिले में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के उद्देश्य से धमतरी पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 14 अक्टूबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, न्यायालय परिसर धमतरी के सभागार में विभिन्न थानों से जुड़े पैरालीगल वालेंटियर्स (पीएलवी) के लिए विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं और संदिग्ध लिंक से होने वाले साइबर अपराधों की जानकारी देते हुए बचाव के उपाय बताए गए।

पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू एवं उनकी तकनीकी टीम ने प्रतिभागियों को साइबर अपराधियों के नए तौर-तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। साथ ही, प्रशिक्षित पैरालीगल वालेंटियर्स को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।


डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर की जा रही ठगी

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग या न्यायालय का अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं और गंभीर अपराध में संलिप्त होने का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाते हैं। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर पैसों की मांग की जाती है। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी स्थिति में पैसे नहीं देने चाहिए।

इसके अलावा ऑनलाइन टास्क के नाम पर ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं में अधिक मुनाफे का लालच, बैंक खाते और सिम कार्ड की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामलों के प्रति भी जागरूक किया गया।


ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें

साइबर पुलिस की टीम ने नागरिकों को सलाह दी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी और बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करने तथा किसी के कहने पर एनीडेस्क और टीमव्यूअर जैसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से भी बचें। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल और घर बैठे कमाई के नाम पर चलने वाली संदिग्ध योजनाओं से सतर्क रहने की अपील की गई।


ठगी होने पर तत्काल 1930 पर करें शिकायत

धमतरी पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा भारत सरकार के आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत करने से संबंधित लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की संभावना बढ़ती है और ठगी की राशि को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।


गांवों और शहरों में जागरूकता फैलाएंगे वालेंटियर्स

पुलिस ने पैरालीगल वालेंटियर्स से हाट-बाजारों, स्कूलों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने की अपील की। विशेष रूप से महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों तक साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया।

धमतरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्क रहें, अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें और किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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