गौतम ऋषि पर्वत को पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा विकास का प्रस्ताव
55 किमी बारहमासी सड़क, सोढुर और आमकड़ा नदी पर पुल-पुलिया निर्माण की मांग; इको ट्रैकिंग रूट और सोलर लाइट से संवर सकता है वनांचल
नगरी / धमतरी, 15 अक्टूबर 2026। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत मांदागिरी स्थित प्राचीन गौतम ऋषि पर्वत को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल शुरू हो गई है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा के समक्ष क्षेत्र के विकास, आवागमन की सुविधा और पर्यटन की संभावनाओं को लेकर विस्तृत प्रस्ताव रखा। ग्रामीणों ने गौतम ऋषि पर्वत को पर्यटन मानचित्र पर शामिल करने के साथ सड़क, पुल-पुलिया और सोलर लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग की है।
जय गौतम ऋषि सेवा समिति मांदागिरी के माध्यम से प्रस्तुत इस प्रस्ताव में प्राचीन धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व वाले गौतम ऋषि पर्वत को व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की रूपरेखा रखी गई है। समिति के अध्यक्ष मंगल सिंग नाग ने बताया कि कलेक्टर अविनाश मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा द्वारा हाल ही में गंगरेल डुबान क्षेत्र सहित दुर्गम पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विकास की संभावनाओं पर पहल की गई है। इससे प्रेरित होकर समिति और ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास का प्रस्ताव तैयार किया है।
12 किमी इको ट्रैकिंग रूट विकसित करने की मांग
समिति ने गौतम ऋषि पर्वत तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे इको ट्रैकिंग रूट का विकास करने की मांग की है। इसके अंतर्गत पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित करने, आवागमन को सुगम बनाने और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्राचीन स्थल को उचित पहचान मिलने से क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिल सकती है।
55 किमी सड़क और दो नदियों पर पुल की जरूरत
ग्रामीणों ने नगरी-करका-मांदागिरी से मेचका तक लगभग 55 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़क के निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई। इसके साथ ही सोढुर नदी और आमकड़ा नदी पर उच्चस्तरीय पुल-पुलिया निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क और पुल-पुलिया के अभाव में बारिश के दौरान क्षेत्र के 15 से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित होता है। कई बार आवागमन बाधित होने से स्कूली बच्चों, मरीजों, ग्रामीणों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारहमासी सड़क और मजबूत पुल-पुलिया का निर्माण होने से न केवल आवागमन की समस्या दूर होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में सोलर लाइट लगाने की मांग भी की गई, ताकि दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में रोशनी की व्यवस्था बेहतर हो सके।
पर्यटन से स्थानीय युवाओं को मिल सकता है रोजगार
समिति ने प्रस्ताव के माध्यम से यह भी बताया कि गौतम ऋषि पर्वत को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने पर आदिवासी युवाओं के लिए स्थानीय गाइड, होम-स्टे और अन्य स्वरोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही रोजगार के नए विकल्प मिल सकेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, आवागमन की कठिनाइयों और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर आवश्यक पहल की जाए, ताकि लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे गांवों को राहत मिल सके और गौतम ऋषि पर्वत को पर्यटन के क्षेत्र में पहचान दिलाने की दिशा में काम आगे बढ़े।
इस अवसर पर जनपद सदस्य सिरधन सोम सहित संत नेताम, राधिका नेताम, नरेश मांझी, संजय भंडारी, दुलछद कुंजाम, बीरबल पदमाकर, ईश्वरी नेताम, रेवा प्रसाद देवदास, श्रीराम चिंडा, राजेश्वरी बाई करही, चंद्रकुमार, हिम्मत सिंग, दीनदयाल मरकाम, श्यामलाल मरकाम, धनेश मरकाम, लोविंद मरकाम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




